बरेली। बरेली-मथुरा हाईवे के चौड़ीकरण के लिए हरियाली पर आरी चलेगी। इसके लिए पेड़ों की गिनती शुरू कर दी गई है। अनुमान है कि आठ हजार से ज्यादा पेड़ काटे जाएंगे। हाईवे चौड़ीकरण के लिए पिछले दो वर्ष में यह सबसे बड़ी कटान होगी। पिछले साल लाल फाटक से रामगंगा तक छह किमी. सड़क के चौड़ीकरण के लिए 6,500 वृक्ष काटे गए थे। बरेली-पीलीभीत-सितारगंज हाईवे के चौड़ीकरण के लिए जिले की सीमा में 3,240 वृक्षों की कटान को भी मंजूरी मिल चुकी है।
बरेली-मथुरा हाईवे का चौड़ीकरण नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) करा रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की गाइड लाइन के अनुसार जितने पेड़ काटे जाने हैं, उससे दो गुना पौधरोपण होना चाहिए। जिले में वन भूमि काफी कम है। ऐसे में लाल फाटक से रामगंगा तक पिछले साल काटे गए 6,500 वृक्षों के स्थान पर बिजनौर के नजीबाबाद के जंगलों में पौधरोपण किया गया। बरेली-पीलीभीत-सितारगंज हाईवे के चौड़ीकरण के लिए काटे जाने वाले पेड़ों के बदले पौधरोपण के लिए पूर्वांचल के मिर्जापुर जिले में पौधरोपण के लिए 58 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की गई है।
पेड़ों की कटान और पौधरोपण का खर्च भी एनएचएआई को देना होगा। बरेली-मथुरा हाईवे पर पेड़ों की गणना करने के बाद एनएचएआई वन विभाग को प्रस्ताव देगा। इसके आधार पर वन विभाग तय करेगा कि इसके बदले पौधरोपण कहां किया जाएगा?
कटान के लिए पेड़ों की गणना की जा रही है। इसके बाद वन विभाग से अनुमति मांगी जाएगी। नियमानुसार दोगुना पौधरोपण किया जाएगा। एनएचएआई ही पूरा खर्च उठाएगा। - उत्कर्ष शुक्ला, पीडी एनएचएआई
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