बरेली। बीते वित्तीय वर्ष में 15वें वित्त आयोग की संस्तुतियों से प्राप्त धनराशि के खर्च का ब्योरा ग्राम पंचायतें पोर्टल पर अपडेट नहीं कर सकीं। ऐसे में पोर्टल पर ग्राम पंचायतों के पास 51.91 करोड़ रुपये अवशेष दिख रहे हैं पर हकीकत में उनके खाते खाली हैं। पोर्टल पर बजट अवशेष दिखने की वजह से शासन ने चालू वित्तीय वर्ष के छह महीने बीतने के बाद भी बजट जारी नहीं किया है। इससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
15वें वित्त आयोग की संस्तुतियों के अनुरूप अप्रैल में पहली और सितंबर में दूसरी किस्त जारी होती रही है पर इस वर्ष अब तक एक भी किस्त जारी नहीं हुई है। जिला पंचायत राज अधिकारी धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि पहले ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर हिसाब-किताब दर्ज होता था। अब नया गेटवे आ गया है। सिस्टम बदलने से आंकड़े फीड नहीं हो सके। इसलिए चालू वित्तीय वर्ष के लिए बजट आवंटित नहीं हो सका है। अब ग्राम पंचायत सचिवों से पोर्टल पर आंकड़े दर्ज कराने और वार्षिक पुस्तिका को बंद करने के लिए कहा गया है, ताकि इस वित्तीय वर्ष का बजट जारी हो सके।
निदेशक ने जारी किए आदेश
पंजायती राज विभाग के निदेशक राजकुमार ने 17 अक्तूबर को वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए 15वें वित्त आयोग की धनराशि जारी करने के संबंध में सभी जिलाधिकारियों के पास आदेश भेजे हैं। इसमें उन्होंने वर्ष 2022-23 की वार्षिक पुस्तिका शत-प्रतिशत बंद कराने तथा 2021-22 की ऑडिट रिपोर्ट अपलोड कराने के लिए कहा है। इसके बाद ही 2023-24 की प्रथम किस्त भारत सरकार से जारी हो सकेगी।