बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में बुधवार से स्नातक विषम सेमेस्टर की परीक्षाएं आपाधापी के बीच शुरू हुईं। अपनी समस्याओं का समाधान कराने के लिए परीक्षार्थी कॉलेज से विश्वविद्यालय तक चक्कर काटते रहे। वहीं, जिनकी परीक्षाएं आगामी दिनों में हैं, वे अभिभावक के साथ परीक्षा नियंत्रक कार्यालय तक पहुंचे।
346 केंद्रों पर परीक्षा कराई गई। पहली पाली सुबह 8.30 से 10.30 बजे तक, दूसरी सुबह 11.30 से दोपहर 1.30 बजे तक व तीसरी दोपहर 2.30 से शाम 4.30 बजे तक चली। इसमें बीए, बीएससी, बीकॉम व बीबीए के विद्यार्थी शामिल रहे। सुबह की पाली में काफी विद्यार्थी ऐसे भी पहुंचे, जिनके फॉर्म अग्रसारित करने की समस्या आ रही थी। समाधान नहीं होने पर छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय पहुंचे। वहीं, बरेली कॉलेज में छात्र-छात्राओं ने प्राचार्य प्रो. ओपी राय से मुलाकात की, जिसके बाद उनका डाटा दिखवाया गया।
बरेली कॉलेज में पकड़े गए पांच नकलची
बरेली कॉलेज के चीफ प्रॉक्टर प्रो. आलोक खरे के अनुसार तीनों पालियों में भौतिकी विषय के छात्र नकल करते हुए पकड़े गए हैं। पहली पाली में बीएससी प्रथम सेमेस्टर का छात्र पर्ची से व दूसरी पाली में तृतीय सेमेस्टर का एक छात्र गेस पेपर के पन्नों से नकल करते मिला। तीसरी पाली में पांचवें सेमेस्टर के तीन विद्यार्थी पर्ची व गेस पेपर के पन्नों से नकल कर रहे थे। प्रॉक्टोरियल बोर्ड की टीम ने निरीक्षण के दौरान इन छात्रों को पकड़ा लिया। टीम ने छात्रों की नकल सामग्री व उत्तर पुस्तिका जब्त कर ली। साथ ही सूचना विश्वविद्यालय को दी गई। तीसरे पाली में बैक परीक्षा देने पहुंचा एक छात्र कक्षा में फोन साथ लाया था। कॉपी वितरण से पूर्व फोन लेकर छात्र को चेतावनी दी गई। इसके बाद उसे परीक्षा में बैठाया गया।
दिव्यांग के लिए कोई व्यवस्था नहीं, बाहर बैठकर हल किया पेपर
बरेली कॉलेज के नए परीक्षा भवन के बाहर करीब 11:15 बजे साहूकारा निवासी बीकॉम के छात्र ध्रुव पहुंचे। यहां रैंप की सुविधा नहीं होने से उन्हें भवन के बाहर अपने ई-वाहन के सहारे परीक्षा देनी पड़ी। अन्य दिव्यांग विद्यार्थियों को भी इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ा। वरिष्ठ शिक्षकों ने कहा कि पूर्व में दिव्यांग या शारीरिक रूप से चुनौती झेल रहे विद्यार्थियों को अलग कक्ष की सुविधा दी जाती थी। परीक्षा समिति की बैठक में विद्यार्थियों के हित के कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा नहीं किए जाने की वजह से ऐसा हुआ है। वर्तमान समय में अधिकतर कॉलेजों में दिव्यांग छात्र-छात्राओं को इस तरह की अव्यवस्थाएं झेलनी पड़ रही हैं। संवाद