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सिस्टम हो कैशलेस, इसलिए एटीएम में 40% कैश

Wed, 04 Apr 2018 12:52 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
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करेंसी संकट के बीच इन दिनों बड़ी तादाद में एटीएम खाली हैं। 473 एटीएम को फुल करने के लिए हर रोज जितने कैश की जरूरत होती है, उसके मुकाबले आरबीआई करेंसी चेस्ट को तकरीबन 40 फीसदी ही नकदी मुहैय्या करा रही है। इसके पीछे अंदरखाने तैयारी यह है कि सुनियोजित तरीके से कैश की किल्लत पैदा की जाए, ताकि लोगों का रुझान कैशलेस व्यवस्था की तरफ बढ़ाया जा सके। हालांकि कैशलेस सिस्टम को दुरुस्त किए बगैर की जा रही इस मनमानी से उपभोक्ता और व्यापारी सहित सभी परेशान हैं। इस मामले में बैंक के अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। 
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जिले में काम कर रहीं 421 बैंक ब्रांचों के 473 एटीएम हैं। प्रत्येक एटीएम में 10 लाख रुपये नकदी रखने की क्षमता होती है। इस लिहाज से सभी एटीएम को फुल करने के लिए हर दिन तकरीबन 48 करोड़ रुपये की जरूरत होती है। बताते हैं कि पिछले दो हफ्तों से करेंसी की किल्लत काफी बढ़ गई है। एटीएम को जितनी नकदी की जरूरत है, रिजर्व बैंक आफ इंडिया (आरबीआई) यहां की 14 करेंसी चेस्ट को 40 फीसदी यानी करीब 20 करोड़ का कैश ही उपलब्ध करा रही है। नोट की कमी की वजह से ज्यादातर एटीएम भी लोगों को धोखा दे रहे हैं। बैंक से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो सरकार हो-हल्ला मचाए बगैर कैशलेस सिस्टम को बढ़ावा देने की कवायद में जुटी है। इसलिए अंदरखाने जान बूझकर कैश का संकट पैदा किया जा रहा है। जब एटीएम में पर्याप्त नकदी ही नहीं होगी तो लोगों को मजबूरी में कैशलेस सिस्टम अपनाना होगा। हालांकि इसमें दिक्कत यह आ रही है कि ज्यादातर दुकानों में ऑनलाइन पेमेंट के लिए पॉज मशीन की व्यवस्था ही नहीं है। बड़े दुकानदार या बड़ी संस्थाओं की बात छोड़ दें तो छोटे दुकानदारों की बिक्री का सारा दारोमदार नकद लेनदेन पर ही टिका है, जबकि एटीएम में कैश की कमी से दुकानदार और उपभोक्ता दोनों को ही सरकारी सिस्टम की इस मनमानी से परेशानी झेलनी पड़ रही है। 
 
बैंकों की मनमानी से नहीं निकल रहे छोटे नोट 
नोट संकट का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि तमाम एटीएम में केवल दो-दो हजार रुपये के ही नोट रखे जाते हैं। ऐसे में अगर किसी को एक हजार, तीन हजार या पांच हजार की जरूरत होती है तो एटीएम उतना कैश नहीं निकालता। मजबूरी में एटीएम कार्डधारक को दो हजार के गुणांक में पेमेंट निकालना होता है। लोगों का कहना है कि बैंकों की इस मनमानी से लोगों को जरूरत से ज्यादा या फिर कम कैश निकालना पड़ रहा है। इससे उनका बजट भी गड़बड़ा जाता है। 
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कई एटीएम खाली रहने से पब्लिक परेशान 
एटीएम में पर्याप्त कैश न होने से उपभोक्ताओं को काफी परेशानी हो रही है। विकास भवन के सामने बैक ऑफ बड़ौदा में कैश न होने से लोगों को असुविधा झेलनी पड़ी। स्टेडियम रोड पर यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम में भी शटर गिरा रहा। इसी तरह इंडियन ओवरसीज बैंक, पीएनबी, एसबीआई सहित कई बैंकों के एटीएम में भी कैश की कमी की वजह से पब्लिक को परेशानी झेलनी पड़ रही है। 

व्यापारियों की बात

एकदम से न थोपें प्लास्टिक मनी 
कैशलेस सिस्टम अभी इतना मजबूत नहीं है कि लोगों पर एकाएक प्लास्टिक मनी थोप दी जाए। सरकार को इसके लिए पूरी तैयारी करनी चाहिए। इन दिनों एटीएम में कैश कम करने के पीछे सरकार की मंशा कुछ भी हो पर इससे कारोबार धड़ाम हो रहे हैं। उपभोक्ता और व्यापारी दोनों ही परेशान हैं। - राजेंद्र गुप्ता, व्यापारी 
 
बैंक और एजेंसियों की मनमानी से लोग परेशान 
एटीएम में कैश फिल करने के लिए बड़ी एजेंसियों ने ठेका ले रखा है। इनकी पहुंच काफी ऊंची होने से वे बैंक अफसरों की भी नहीं सुनतीं। कई दिनों की छुट्टी पड़ जाने से एजेंसी एटीएम में कैश नहीं डालती। इससे उपभोक्ता नकदी नहीं निकाल पाते। इससे बाजार में मंदी छा जाती है। - सतीश अग्रवाल, व्यापारी 

करेंसी की कमी न हो, इसलिए लिए करेंसी चेस्ट को समय-समय पर यह निर्देश दिए जाते हैं कि वह जरूरत के हिसाब से आरबीआई से नकदी की डिमांड करती रहे। जरूरत पड़ने पर इसकी मॉनीटरिंग भी की जाती है। जहां तक एटीएम में कैश की कमी की बात है तो वह इसकी जानकारी लेंगे। फिलहाल इस पर कुछ कहना मुमकिन नहीं है। -ओपी बढेरा, लीड बैंक अधिकारी 
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