प्रदेश सरकार निष्ठा से काम करे और नारेबाजी के चक्कर में न पड़े। प्रदेश को जितना दिया गया, वह उतना ही खर्च ही नहीं कर पा रही, इससे किसानों को नुकसान हो रहा है। उत्तर प्रदेश और बिहार में किसान को पूरा समर्थन मूल्य नहीं मिलता है। इससे किसानों को औने-पौने दामों में अपनी फसल बेचनी पड़ती है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने आईवीआरआई में हुई पत्रकार वार्ता में प्रदेश सरकार की खामियां गिनाईं और जमकर कोसा। उन्होंने कहा कि कृषि राज्य सरकार का विषय है। जब राजनाथ सिंह मुख्यमंत्री थे, अच्छी खरीद होती थी। बिना राज्य के योजनाएं नहीं चल सकती।
मंत्री राधा मोहन सिंह ने बताया कि कृषि का बजट बढ़ेगा। हमने योजनाओं में पहले ही बजट बढ़ा दिया है, इसलिए कृषि का बजट तो बढ़ाना ही पड़ेगा। गन्ना किसानों की समस्याओं पर उन्होंने केन कंट्रोल एक्ट हवाला दिया। उन्होंने कहा कि केन कंट्रोल एक्ट के तहत मिल मालिक अगर किसानों को भुगतान नहीं करते हैं तो प्रदेश सरकार उन पर एफआईआर दर्ज करा सकती है और ज्यादा गड़बड़ होने पर अपने कंट्रोल में भी ले सकती है। उन्होंने कहा कि कल्याण सिंह ने सारे मिल मालिकों पर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। सभी मिल मालिक उनके पास पहुंच गए और भुगतान के लिए 14 दिन का समय मांगा। इसके बाद भुगतान किया। यहां तो चीनी मिल ही बेच दी जा रही हैं। हमने गन्ना किसानों के लिए 21 हजार करोड़ रुपये घोषित किए और कहा कि जितना किसानों के खातों में जाएगा, उतना ही मिल मालिकों को दिया जाएगा लेकिन मिल मालिक एक हजार करोड़ ही ले पाए। गन्ने के समर्थन मूल्य बढ़ाने पर मंत्री बोले, पहले जो समर्थन मूल्य तय किए गए हैं, वह तो मिल पाएं। हमारी यह प्राथमिकता है कि किसानों को तय समर्थन मूल्य दिलवाए जाए।
केंद्र सरकार नई तकनीक लाने के लिए क्या रही है, इस पर राधा मोहन सिंह ने बताया कि हमने रांची और असम में शोध संस्थान खोले हैं। कृषि वैज्ञानिक लैब के अंदर नए-नए प्रयोग करते हैं, लेकिन किसानों तक कम पहुंचते हैं। इसके लिए हमने 20 हजार वैज्ञानिकों के चार-चार समूह बनाकर 25 हजार गांव गोद लेने के लिए कहा है।