75 प्रतिशत अथवा तीन माह के वेतन के बराबर धनराशि निकाल भी सकेंगे कर्मचारी
बरेली। कोरोना वायरस आपदा से बचने के लिए लागू लॉकडाउन से उद्योग और कारोबार प्रभावित हुए हैं। इससे विभिन्न प्रतिष्ठानों में कार्यरत कर्मचारी भी अछूते नहीं हैं। इसलिए केंद्र सरकार अप्रैल से जून यानी तीन माह तक ईपीएफ धनराशि खुद जमा करेगी। यहां खास यह है कि ईपीएफ खाते से 75 प्रतिशत अथवा तीन माह के वेतन के बराबर धनराशि निकाली भी जा सकता है।
केंद्रीय श्रम व रोजगार मंत्रालय ने ‘महामारी अग्रिम सुविधा’ शुरू की है। इसके तहत ईपीएफ सदस्य अपने खाते से 75 प्रतिशत तक अथवा तीन माह के मूल वेतन, महंगाई भत्ते में जो भी कम हो, निकाल सकते हैं। इस संबंध में भविष्य निधि संगठन ने आदेश जारी कर दिए हैं। इस योजना से लॉकडाउन मेें प्रभावित हुए हजारों कर्मचारियों को फायदा मिलेगा।
लॉकडाउन में हजारों उद्योग, धंधे और प्रतिष्ठान प्रभावित हुए हैं, जिससे कारोबारी और उद्यमियों पर आर्थिक बोझ आ गया है। कारखानों और संस्थानों में कार्यरत कर्मियों की ईपीएफ किश्त जमा होना मुश्किल हो गया है। सरकार ऐसे प्रतिष्ठानों, जिसमें सौ अथवा इससे कम कर्मचारी हों और 90 प्रतिशत कर्मी 15 हजार रुपये से कम पाते हों, उनकी विशेष मदद करेगी। इसके तहत सरकार इन प्रतिष्ठानों का अगले तीन माह तक कर्मचारी और नियोक्ता का ईपीएफ अंश (12-12 प्रतिशत) खुद जमा करेगी। इससे उद्योग और उद्यमियों की बड़ी समस्या का समाधान होगा।
लॉकडाउन से औद्योगिक समेत सभी क्षेत्रों में कार्यरत लाखों स्टाफ और श्रमिक प्रभावित हुए हैं। सौ से कम स्टाफ वाले प्रतिष्ठानों का ईपीएफ अंश राशि तीन माह तक सरकार वहन करेगी। आर्थिक समस्या से परेशान कर्मी तीन माह का वेतन ईपीएफ खाते से निकाल सकेंगे।
- संतोष गंगवार, केंद्रीय श्रममंत्री