यह था मामला
पीलीभीत के बीसलपुर-खुदागंज मार्ग स्थित रपटुआ नाले पर 5.14 करोड़ रुपये की लागत से लघु सेतु निर्माण के लिए अभियंताओं ने चहेती फर्म मैसर्स एएम बिल्डर्स को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों को ताक पर रखा था। बदायूं के सतीश चंद्र दीक्षित की फर्म को टेंडर नहीं मिला था।
शिकायत पर हुई जांच में लोकायुक्त ने तत्कालीन मुख्य अभियंता डीके मिश्र, एमएम निसार व अधीक्षण अभियंता हरस्वरूप सिंह को दोषी पाया था। साथ ही पीलीभीत के तत्कालीन अधिशासी अभियंता अनिल राना को नियम विरुद्ध संस्तुतियों और बदायूं के तत्कालीन अधिशासी अभियंता हेमंत सिंह को सतीश चंद्र दीक्षित की फर्म का अनुभव प्रमाणपत्र निरस्त करने का जिम्मेदार बताया।