बरेली। सफलता उम्र की मोहताज नहीं होती। इस बात को साबित किया है फरीदपुर की सीमा ने। 44 वर्ष की उम्र में उन्होंने कामयाबी की उड़ान भरी। ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं होने के बावजूद भी उनका कारोबारी बनने का सपना साकार हुआ। सिरके ने उनको पहचान दिलाई। अब स्वयं आत्मनिर्भर होने के साथ ही वह दूसरी महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं।
सीमा ने परिवार की महिलाओं से ही सिरका बनाना सीखा। उन्होंने खुद का बनाया सिरका पैक करके बाजार में बेचना शुरू किया। बाजार में पहचान बनी तो उन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर क्लीनिंग उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद उन्होंने क्लीनिंग उत्पादों की फैक्ट्री भी डाल दी। काम बढ़ा तो अन्य महिलाओं को भी साथ जोड़ा। महिलाएं सभी उत्पाद तैयार करके उसे बाजार तक पहुंचाती हैं।
तैयार माल को बाजार में खपाने के लिए सीमा ने लोगों से बात करना शुरू किया। ग्रामीण परिवेश की कम पढ़ी-लिखी महिला के लिए यह काफी चुनौतीपूर्ण था। पहले व्यापारियों ने उनका तैयार माल लेने से मना कर दिया। फिर धीरे-धीरे एक-दो ऑर्डर मिले। उत्पादों की गुणवत्ता की परख कराने के लिए सीमा ने व्यापारियों को कुछ सैंपल दिए जो खरे उतरे। इसके बाद उनकी गाड़ी चल पड़ी।