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Bareilly News: दो दशक में आठ गुना बढ़ी सोने की चमक

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बरेली। सोना समृद्धि का प्रतीक और निवेश का बेहतर विकल्प माना जाता है। यही कारण है कि बीते दो दशक में जहां सोने की कीमत में आठ गुना इजाफा हुआ है, वहीं चांदी 16 गुना महंगी हुई है। भाव आगे और बढ़ेंगे या कुछ कम होंगे, इसे लेकर कारोबारियों के अलग-अलग मत हैं।
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प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल बरेली के महामंत्री सुदेश अग्रवाल के मुताबिक प्रत्येक देश की मुद्रा देश के भीतर ही चलती है, मगर सोना हर जगह चलता है। कैश के बाद सोना सबसे तरल निवेश है। सोने को कभी भी बेचकर बाजार मूल्य के बराबर पैसा पाया जा सकता है। लंबी अवधि के निवेश के लिए भी इसे बेहतर विकल्प माना जाता है। इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि 20 साल पहले जिसने सोना खरीदा था, अब उसकी कीमत में आठ गुना इजाफा हो चुका है।
बताया कि कमोडिटी मार्केट के अनुसार डॉलर का गिरना, फेड रेट बढ़ने की कम उम्मीद, मंदी का भय, विदेशी बैंकों का डूबना, शॉर्ट कवरिंग, कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि, रूस-यूक्रेन युद्ध आदि वजहें भी सोने की कीमतों को प्रभावित करती हैं।
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छोटे निवेश में पुरुष से आगे महिलाएं
बरेली सराफा एसोसिएशन के महामंत्री दिनेश अग्रवाल के मुताबिक छोटे-छोटे निवेश करने में पुरुषों से आगे महिलाएं हैं। वे जाने-अनजाने सोना खरीदकर छोटे-छोटे निवेश करती रहती हैं। गहनों की खरीदारी भी आर्थिक मजबूती की वजह बनती है। वर्षों पहले जिन महिलाओं ने सोने में निवेश किया था, रिटर्न अब कई गुना बढ़ चुका है।

दस साल में दोगुना हुआ सोने का भाव
सराफा कारोबारियों के मुताबिक महज दस साल में ही सोने के भाव दो गुना से अधिक हो गया है। साल 2012 में सोना 29,500 रुपये प्रति दस ग्राम था जो अब 62,100 रुपये तक जा पहुंचा है। साल दर साल बढ़ती कीमतों पर गौर करें तो साल 2022 से साल 2023 मई में सोने के भाव में करीब दस हजार रुपये का उछाल आया है। वहीं, सालभर में चांदी भी दस हजार से ज्यादा महंगी हुई है।

पिछले दस साल में मई में सोना-चांदी के भाव
साल सोना चांदी
2023 62,100 75,000
2022 52,600 64,000
2021 लॉकडाउन
2020 लॉकडाउन
2019 32,750 38,100
2018 32,320 40,500
2017 28,600 38,300
2016 30,225 41,100
2015 27,300 38,100
2014 30,300 42,800
2013 29,870 52,000
2012 29,500 55,500

-सराफा बाजार की उड़ी रंगत

आलमगिरी गंज के सराफा कारोबारी अंकुर शर्मा के मुताबिक सोने-चांदी के भाव बढ़ने से लोग भारी गहनों की खरीदारी से कतरा रहे हैं। इसके बदले वे कम वजन के गहनों की खरीदारी कर रहे हैं। सोने की चूडियां, हार, मंगलसूत्र तो खरीद रहे हैं पर उनका वजन बजट के अनुसार तय कर रहे हैं। सोने का पेंडेंट, चेन, ईयर रिंग, नोज रिंग-पिन, मांग टीका और हल्के वजन की चूड़ियां ले रहे हैं। बताया कि कुछ लोग ऐसे भी हैं जो पुराने गहनों को बदलकर उसके बदले नई डिजाइन के गहने ले रहे हैं।

केस एक
आजाद नगर की गायत्री के पति का निधन साल 2010 में हुआ था। बेटी की शादी के लिए छह लाख रुपये जमापूंजी रखी थी। अब विवाह के लिए गहने खरीदने पहुंचीं तो एक चेन, पेंडेंट, ईयररिंग ही खरीद सकीं। बेटी को हार देने का मन था पर महंगाई से हिम्मत नहीं जुटा सकीं।
केस दो
हरुनगला के राम किशोर ने बेटी की शादी के लिए पांच लाख रुपये जुटाकर रखे थे। बाजार पहुंचे तो 62 हजार के पार पहुंचे सोने की कीमत से ठिठक गए। हार और मंगलसूत्र देना चाहते थे। पत्नी के पुराने गहने साथ ले आए थे। कुछ नकद और कुछ गहने बदलकर नई डिजाइन में लिए हैं।
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