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परमात्मा ही है परम सत्य : सुमित सुगम

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कथावाचक सुमित सुगम।
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उघैती। कस्बा के गुप्ता चौक में चल रही राम कथा के चौथे दिन कथावाचक सुमित सुगम ने भी विधि विधान से पूजन अर्चन के साथ कथा प्रारंभ की। उन्होंने कहा कि परमात्मा ही परम सत्य है। जब हमारी वृत्ति परमात्मा में लगेगी तो संसार गायब हो जाएगा।
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उन्होंने कहा कि चारों पुत्रों का विवाह होने के बाद राजा दशरथ ने श्रीराम को अयोध्या का राजा बनाने का निर्णय लिया। यह समाचार सुन नगर में खुशियां मनाई जाने लगीं। इसी बीच महारानी कैकेयी ने राजा दशरथ से राम को चौदह वर्ष वनवास का वर मांग लिया। पिता की आज्ञा पाकर भगवान राम ने जब भाई लक्ष्मण व पत्नी सीता के साथ वन के लिए प्रस्थान किया तो पूरी अयोध्या उनके पीछे-पीछे चल पड़ी। जब भगवान राम नदी पार करने के लिए उसके तट पर पहुंचे तो यह खबर सुनते ही निषाद राज खुशी से फूले नहीं समाए। उन्हें नदी के पार उतारा। जब भगवान राम उतराई के तौर पर निषाद को मां सीता की अंगूठी देने लगे तो निषाद राज ने कहा कि हे भगवान जिस तरह मैने आपको अपनी नैया से पार उतारा है, उसी प्रकार आप मेरी भी नैया को भवसागर से पार लगा देना। कथा वाचक ने कहा कि इधर, पुत्र बिछोह से व्याकुल होकर राजा दशरथ ने अपने प्राणों का परित्याग कर दिया। रामवन गमन की कथा सुन श्रद्धालुओं की आंखे भर आईं। इस दौरान मुकेश गुप्ता, बीके चंचल, संजीव गुप्ता, पप्पू गुप्ता, मोहित गुप्ता, गोविंद गुप्ता सहित आदि ग्रामीण मौजूद रहे।
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