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Bareilly News: सीएम के पास जाओ या डीएम के, कागज लौटकर मेरे पास ही आएगा

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बरेली। पारिवारिक विवाद में गंभीर धाराओं में कराई गई रिपोर्ट में बिना किसी साक्ष्य के करगैना चौकी प्रभारी ने न केवल युवक को जेल भेज दिया, बल्कि उसके मामा को भी जेल भेजने की धमकी दे रहे थे। रिश्वत न देने पर उन्होंने चेताया था कि चाहे डीएम के पास जाओ या सीएम के, कागज लौटकर मेरे ही पास आएगा।
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विजय प्रकाश पाठक ने बताया कि उनके बहनोई व बहन में पारिवारिक विवाद चल रहा है। वह अपनी बहन व उनके बच्चों की मदद करते रहते हैं। बहनोई की ओर से तलाक के लिए दबाव बनाया जा रहा था, पर बहन इसके लिए तैयार नहीं थी। इसी मामले में दबाव बनाने के लिए बहनोई के बड़े भाई ने उनके और उनके भांजे आदर्श के खिलाफ अपने बेटे पर कार चढ़ाने की कोशिश की रिपोर्ट करा दी थी। जिस वक्त ये घटना दिखाई गई, वह एक निजी कॉलेज में एलएलबी का पेपर दे रहे थे। बाद में रिपोर्ट कराने वाले वादी से उनके भांजों का समझौता हो गया और उन्होंने भी कार्रवाई न करने की बात लिखकर दे दी।
इसके बावजूद बिना साक्ष्य व आधार के करगैना चौकी प्रभारी धर्मेंद्र देशवाल ने उनके भांजे आदर्श को जेल भेज दिया। समझौते की प्रति कोर्ट में पेश करने पर जमानत हो सकी। देशवाल चार दिनों से लगातार किसी न किसी बहाने चौकी में बुलाकर आदर्श को परेशान कर रहा था। उसने साफ कहा था कि फर्जी मामला है, वह चाहे तो आज उन लोगों को क्लीनचिट दे देगा, पर उसे रुपये नहीं दिए तो वह रस्सी का सांप बना देगा। फिर चाहे कहीं शिकायत करो, लौटकर उसी के पास आएगी। तब मजबूर होकर उन्हें एंटी करप्शन टीम के पास जाना पड़ा।
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वसूली के चक्कर में एसएसपी का फरमान भी भूले
नए एसएसपी अनुराग आर्य की साफ हिदायत है कि मुकदमों में खेल करने वाले विवेचकों के लिए कोई माफी नहीं है। इसके बाद भी विवेचक वसूली के चक्कर में पड़कर मुकदमे में खेल करने से नहीं चूक रहे हैं। करगैना चौकी इंचार्ज ने यदि एसएसपी के निर्देश का पालन किया होता तो शायद उन्हें जेल नहीं जाना पड़ता। चौकी प्रभारी विवेचना में खेल करने के लिए आरोपियों से सांठगांठ कर रहे थे और पकड़े गए। अब निलंबन के बाद विभागीय जांच भी उन्हें झेलनी पड़ेगी। ब्यूरो
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