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लखनऊ से पहले छोटे स्टेशन पर उतार लीं लड़कियां!

Thu, 12 Oct 2017 01:55 AM IST
बरेली
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पठानकोट जा रही लोहित एक्सप्रेस से मानव तस्करी के लिए ले जाई जा रही झारखंड की लड़कियों को लखनऊ से पहले ही एक छोटे स्टेशन पर उतार लिया गया था। खुफिया इकाइयों का मानना है कि लखनऊ से आगे निकलकर ट्रेन को चेक किए जाने की सूचना तस्करों तक लीक हो गई, जिसके बाद लड़कियों को ट्रेन से उतारने के बाद कहीं रखा गया है। खुफिया इकाई लखनऊ के आसपास मानव तस्करों का ठिकाना तलाश करने में जुटी हुई हैं। 
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बुधवार को लड़कियों को लोहित एक्सप्रेस में रांची से तस्करी कर दिल्ली ले जाए जाने की सूचना पर देर रात तक लखनऊ, शाहजहांपुर और बरेली जंक्शन पर ट्रेन की चेकिंग के लिए टीमें इकट्ठी थीं। लड़कियों के फोटोग्राफ भी पुलिस के पास मौजूद थे।आरपीएफ, जीआरपी और चाइल्ड हेल्पलाइन की टीमों ने ट्रेन की कई स्टेशनों पर जांच की लेकिन ट्रेन में लड़कियां नहीं मिलीं। खुफिया अधिकारी अब बता रहे हैं कि मानव तस्करी की सूचना मिलने के बाद उन्होंने इसे काफी गोपनीय रखा था लेकिन शायद यह सूचना लीक हो गई। तस्करों ने ट्रेन में चेकिंग की भनक लगने के बाद लड़कियों को लखनऊ से पहले ही किसी छोटे स्टेशन पर उतार लिया।


पंजाब के फार्म हाउसों पर बेची जा रही झारखंड और बिहार की लड़कियां
बरेली।
झारख़ंड से दिल्ली के बीच मानव तस्करी का धंधा बड़े पैमाने पर चल रहा है। अनुमान के मुताबिक झारखंड के अलग-अलग इलाकों से हर महीने दर्जनों कम उम्र की लड़कियां दिल्ली और पंजाब तक ले जाई जाती हैं। पुलिस और खुफिया इकाइयां काफी समय से कोशिशें करने के बाद भी मानव तस्करों के नेटवर्क को तोड़ नहीं पाई हैं।
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मानव तस्करी के नेटवर्क पर काम करने वाले एक अधिकारी के मुताबिक पंजाब के बड़े फार्म हाउसों में लड़कियों की काफी डिमांड रहती है। यहां एक लड़की की एक से डेढ़ लाख तक कीमत अदा की जाती है। लड़कियों को लाते वक्त आंख पर पट्टी रहती है। एक से दो साल फार्म हाउस पर बंधक  रखने के बाद उन्हें वापस भेज दिया जाता है। लड़कियां अगर पकड़ी भी जाए तो उन्हें कहां रखा गया, यह नहीं बता पाती। एसटीएफ को शाहरुख और अदनान नाम के दो मानव तस्करों का इनपुट मिला, लेकिन उन्हें पकड़ा नहीं जा सका है। दोनों का नेटवर्क पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर उत्तराखंड तक हैं। इनके संपर्क में दो महिलायें भी हैं, जो लड़कियों को पंजाब तक भेजती है। 
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6 अक्तूबर 2016
दिल्ली के एक रईस परिवार द्वारा बंधक रखी गई दो बच्चियां चंगुल से छूटकर ट्रेन के जरिये बरेली जंक्शन पहुंची थी। एक बच्ची रांची और दूसरी झारखंड के गोडो जिले की थी। बच्चियों ने बताया था कि उन्हें बरेली के एक व्यक्ति के जरिये दिल्ली के परिवार को बेचा गया था। वहां उनके जैसी और लड़कियां भी रखी गईं थी। बरेली पुलिस ने दिल्ली पुलिस को इनपुट दिए, लेकिन उन्हें बरामद नहीं कराया जा सका। 
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जून 2017
अमरोहा के फार्म हाउस से छूटी तीन मासूम बच्चों को बरेली जंक्शन पर पकड़ा गया। बहराइच में खैरी थाना क्षेत्र के गढ़ीघाट निवासी तीनों बच्चों की उम्र आठ से बारह साल थी। बच्चों ने बताया था कि ठेके पर काम कराने के लिए पंजाब, हरियाणा, दिल्ली में बेचा जाता है। बच्चों ने बताया था कि ठेकेदार शराब के नशे में उनसे मारपीट करता था। कमरे में बंद करके मार देने की धमकी देता था। जीआरपी ने बच्चों को घरों तक पहुंचाया था। 
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24 जनवरी 2017 
गाजियाबाद के एक व्यापारी के पास बेचने को ले जाई जा रही अमरोहा की छात्रा को शाहजहांपुर पुलिस ने बरामद किया था। पुलिस ने तीन तस्कर नईम, रुखसाना और मुस्कान को पकड़ा था। छात्रा का ढाई लाख में सौदा किया गया था। अमरोहा की हसनपुर निवासी किशोरी को रूखसाना ने अच्छी शादी और नौकरी का झांसा दिया था। कई युवतियों के फोटो और शादियों के फर्जी प्रमाणपत्र बरामद हुए थे। गिरोह के दो सदस्य रेशमा और संजय फरार हो गए। 
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3 मई 2013 
पश्चिम बंगाल से तस्करी करके लाई गई नाबालिग लड़कियों को 20 से 30 हजार तक बेचा जाता था। तस्करों के चंगुल से छूटी एक लड़की मीरगंज पुलिस को मिलने पर फतेहगंज पश्चिमी और मीरगंज से जहांगीर और तीन महिलाओं से सहित आठ बदमाशों को गिरफ्तार किया गया। बंधक बनाकर रखी गई अन्य लड़कियों को छुड़ाने के लिए दबिश दी गई, लेकिन तस्करों ने लड़कियों को हटा दिया था। 
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मानव तस्करी का लिंक झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल से मिलता है। पुलिस की सक्रियता से कुछ मामले पकड़े भी गए। टीमों को सक्रिय किया गया है। 
- एसके भगत, आईजी 
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