शेरगढ़ (बरेली)। आत्महत्या करके युवती ने उस मानसिक यातना से मुक्ति पा ली, जिसका थोड़ा अंदाजा उस वीडियो से ही लगाया जा सकता है जो उसने जहर खाने से पहले अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड किया। जार-जार रोते हुए उसने समाज पर यह कहते हुए सवाल उठाया कि यह दुनिया बिन बाप की बेटियों का जीना मुश्किल कर देती है। उसके पिता जीवित होते तो वह आत्महत्या करने के लिए मजबूर न होती।
पूरा वीडियो हिचकियां ले-लेकर रोते हुए बनाया गया है। युवती ने इसमें कहा है, ‘जब तक यह वीडियो सबके सामने आएगा, वह इस दुनिया में नहीं होगी। मैं पूरे होशोहवास में आत्महत्या कर रही हूं और मेरी मौत के जिम्मेदार तेजपाल गंगवार और उसकी पत्नी हैं। इन दोनों ने मुझे आठ-दस लोगों के बीच पंचायत में बुलाकर बेइज्जत किया और मेरे बारे में तमाम उल्टी-सीधी बातें कही। मुझे इतना बदनाम कर दिया है कि मैं किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रह गई हूं’।
युवती ने वीडियो में कहा है कि बिना बाप की बेटियों की हर बात से लोगों को समस्या होती है। वह किसी से बात भी कर ले तो उसके चरित्र पर उंगली उठानी शुरू कर देते हैं। उसके बारे में भी गांव में तरह-तरह अनर्गल बातें हो रही हैं।
बदनीयती भरी साजिश, हड़पी गई रकम न लौटानी पड़े इसलिए किया बदनाम
युवती की मां के मुताबिक एक साल पहले उन्होंने तेजपाल की मध्यस्थता में शेरगढ़ सत्संग भवन के सामने कस्बे के ही हामिद की आधा बीघा जमीन का सौदा किया था। उन्होंने हामिद को बयाना देने के लिए तेजपाल को 1.65 लाख रुपये दिए थे लेकिन तेजपाल ने उसे सिर्फ 90 हजार रुपये ही दिए और 75 हजार रुपये खुद रख लिए। कुछ समय बाद हामिद ने सौदा रद्द कर उन्हें 90 हजार रुपये लौटा दिए। उन्होंने बाकी रकम के बारे में पूछा तो बताया कि तेजपाल ने उसे 90 हजार रुपये ही दिए थे। उन्होंने तेजपाल से रकम मांगी तो वह टालमटोल करने लगा। उनकी बेटी उसे बार-बार रकम लौटाने के लिए कहती थी। इसी वजह से वह उसे धमकी देने लगा और रकम हड़पने के लिए उसके चरित्र पर उंगली उठानी शुरू कर दी। तेजपाल और उसकी पत्नी ने उसके बारे में झूठी बातें फैलाकर पूरे गांव में उसे बदनाम कर दिया।
निर्दयता से तोड़ दिए होनहार बेटी के सपने
युवती चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी थी। उसके पिता की दस साल पहले मौत हो गई थी, इसके बावजूद उसने एमए के साथ बीएड और बीटीसी किया था। छोटे भाई-बहनों का भविष्य संवारने के लिए उसका सपना सरकारी नौकरी करने का था जिसे पूरा करने के लिए वह दिनरात पढ़ाई में जुटी रहती थी। गांव में बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर घर चलाने में मां की भी भरसक मदद करती थी। कुछ महीनोें से वह फोर्स में भर्ती होने की तैयारी कर रही थी इसलिए रोज दौड़ने जाती थी। गांव में बदनामी फैलने के बाद आठ दिनों से उसने दौड़ने जाना छोड़ दिया था।