बरेली। अलीगढ़ की लड़की का सातवें दिन भी पुलिस मेडिकल नहीं करा पाई। नारी निकेतन से लड़की को लेकर मेडिकल कराने पहुंची प्रेमनगर थाने की बाल कल्याण अधिकारी दरोगा शर्मिला शर्मा से सीएमएस भिड़ गईं। कहने लगी इस तरह किसी लड़की के यौन उत्पीड़न संबंधी मेडिकल नहीं होगा। इसके लिए पहले एफआईआर कराओ। सीएमएस ने साफ कह दिया कि बिना एफआईआर के तो हम सिर्फ प्रेगनेंसी टेस्ट और बाकी शरीर पर आने वाली चोटों का ही मेडिकल करा पाएंगे। बृहस्पतिवार को उन्होंने लड़की को फिर से लेकर आने को कहा है।
नौ जुलाई को लड़की को शास्त्रीनगर की रहने वाली मल्लिका आर्या ने बाल कल्याण समिति की चेयरमैन शीला सिंह के सामने पेश किया था। पहले ही दिन से लड़की कह रही थी कि उसे मामा ने लाकर यहां बेचा था। वह मानव तस्करों के चंगुल से कई लड़कियों के साथ छूटकर आई है। रविवार को मानव तस्करी रोकथाम इकाई की टीम गई तो अचानक लड़की की कहानी बदली हुई बताने लगे। एएचटीयू की टीम ने दावा किया कि लड़की को बेचा ही नहीं गया है। वह मामा-मामी की पिटाई से खफा होकर अलीगढ़ से भाग आई है। अचानक तीन दिन बाद लड़की का बयान बदलने से पुलिस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बुधवार को बाल कल्याण अधिकारी उसे लेकर सीडब्ल्यूसी के आदेश पर लड़की का मेडिकल कराने पहुंचीं तो सीएमएस ने मना कर दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस केस है तो एफआईआर कराकर आओ। ऐसे में तो हम सिर्फ सामान्य मेडिकल ही करा पाएंगे। महिला दरोगा से मेडिकल को लेकर सीएमएस की नोंकझोंक भी हुई। दरोगा ने मामले की शिकायत एसपी क्राइम से की है। बृहस्पतिवार को अब लड़की का मेडिकल कराया जाएगा। उधर मानव तस्करी रोकथाम इकाई के प्रभारी इंस्पेक्टर रामवीर सिंह यादव ने बताया कि लड़की के बताए पते पर उसके मामा की तलाश करने अलीगढ़ गए दरोगा ओमप्रकाश सिंह लौट आए हैं। वहां उन्हें लड़की के मामा के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। लड़की से फिर बातचीत करके मामा का सही पता करके पुलिस की टीम भेजी जाएगी।