फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नगर निगम का वर्दी घोटाला तीन गुना रेट में घटिया वर्दी

Sat, 07 Feb 2015 01:33 AM IST
बरेली
विज्ञापन
विज्ञापन
 दो साल पहले यूपी हैंडलूम ने 425 रुपये में वर्दी के कपड़े की आपूर्ति की थी। सिलाई के लिए कर्मचारियों को 140 रुपये प्रति वर्दी के हिसाब से अलग दिए गए थे।  
विज्ञापन

नगर निगम में 21 सौ सफाई कर्मचारी और 352 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कार्यरत हैं। इसके सापेक्ष गांधी आश्रम से 25 सौ वर्दी की 1310 रुपये के हिसाब से सप्लाई ली गई। अब तक गांधी आश्रम 217 वर्दियों की आपूर्ति कर चुका है जबकि 21 सौ वर्दी की आपूर्ति होनी बाकी है। जिन कर्मचारियों को वर्दी मिली, उसमें रोएं उठने लगे है और नीला कलर भी उड़ चुका। कर्मचारी नेता सतीश ऋषिवाल के मुताबिक वर्दी का कपड़ा हल्का और घटिया है कि रोएं उठने के बाद कर्मचारी उसे पहनने से मना कर रहे हैं। ठीक दो साल पूर्व यूपी हैंडलूम ने 425 रुपये में सर्दी और 570 रुपये में जाड़े की दो वर्दियों के कपड़े की आपूर्ति की थी। सिलाई के लिए 140 रुपये प्रति वर्दी के हिसाब से कर्मचारियों को अलग से दिए गए। इस वर्दी की गुणवत्ता भी ठीक थी। मात्र दो साल में इसी वर्दी के रेट 425 से बढ़कर 1310 रुपये हो गए और गुणवत्ता भी घटिया। मतलब, वर्दी सप्लाई कम रेट में पुरानी संस्था से न लेकर 22 लाख रुपये ज्यादा खर्च करने की योजना बनी। गांधी आश्रम के राजनारायण पांडेय के मुताबिक खुद धुलने से वुलेन का फिनीशिंग कपड़ा पानी में डालने पर रंग छोड़ता है और उसमें रोएं उठ जाते हैं।
कार्यकारिणी में उठा मामला
कार्यकारिणी की बैठक में वर्दी घपले का मामला जोर-शोर से गूंजा। अपर नगर आयुक्त सच्चिदानंद सिंह ने बताया कि वर्दी खरीदने के लिए गांधी आश्रम, यूपी हैंडलूम और यूपिका हैंडलूम के आफर आए थे। दो संस्थाएं सिली हुई वर्दी देने पर सहमत नहीं हुईं। तब गांधी आश्रम पर दबाव बनाकर 1310 रुपये में वर्दी खरीदी गई जबकि वह 1498 रुपये में वर्दी दे रहे थे। एमएनए के मुताबिक वर्दी खरीद में कोई घोटाला नहीं है। कोई चाहे तो पत्रावलियां देख सकता है। बाकी वर्दी का कपड़ा यूपी हैंडलूम से खरीदा जाएगा और सिलाई अलग से दी जाएगी।  
विज्ञापन
विज्ञापन

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें