बरेली। भोजीपुरा में एनसीईआरटी के मार्का वाली नकली किताबें छापने का धंधा एक साल से चल रहा था। इसमें लाखों रुपये माफिया समेट चुके थे। सफेदपोशों के तार इस धंधे से जुड़े बताए जा रहे हैं जो मैनेजरों के जरिये काम चला रहे थे।
सूत्रों ने बताया कि नकली किताबों को बनवाने और बेचने वाले धंधेबाज गाजियाबाद व नोएडा के रहने वाले हैं। इस फैक्टरी में पहले दूसरे काम होते थे, पर धंधा न चलने से बरेली के कारोबारी ने इसे किराए पर दे दिया था। इसके बाद एक साल से यहां नकली किताबों का धंधा चल रहा था। इस फैक्टरी को गाजियाबाद का निवासी नफीस नाम का व्यक्ति संचालित कर रहा था। स्थानीय लोग शुरू में उसी को मालिक मानते थे। बाद में पता लगा कि मालिक दूसरे हैं और नफीस की हैसियत प्रबंधक जैसी है।
अधिकांश समय यहां नफीस ही रहता था। सूत्रों ने बताया कि नकली किताबों के धंधे को यहां रहकर चला रहे नफीस की किसी उद्यमी से पटरी नहीं बैठती थी। वह किसी उद्यमी को फैक्टरी में प्रवेश नहीं करने देता था। फैक्टरी के मुख्य मालिक और संचालक एकाध महीने में यहां लग्जरी कारों से आते थे और नफीस से ही हिसाब करके चले जाते थे। पुलिस यदि गहनता से जांच करे तो इस धंधे मे कुछ सफेदपोशों के नाम भी सामने आ सकते हैं।
शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों की भूमिका संदिग्ध
पत्रकारों ने वार्ता को कहा तो दिल्ली से आई एनसीईआरटी के अधिकारी सहमे दिखे। उनका कहना था कि जब एक साल से धंधा बराबर चल रहा था तो हो सकता है कि शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोग ही इसमें शामिल हों। ऐसे में वह कोई बयान देकर फंसना नहीं चाहते।
अवैध धंधों का अड्डा बना भोजीपुरा औद्योगिक क्षेत्र
भोजीपुरा औद्योगिक क्षेत्र अवैध कारोबारियों का अड्डा बन गया है। वर्ष 2019 में यहां गिलास फैक्टरी पकड़ी गई थी। प्लास्टिक पर प्रतिबंध होने के बाद भी गिलास फैक्टरी चल रही थी। कारोबारी अवैध धंधे के लिए भोजीपुरा औद्योगिक क्षेत्र ही चुनते हैं। निष्क्रय पड़े औद्योगिक क्षेत्र में अफसरों की आवाजाही भी कम रहती है।