आल तू जलाल तू, आई बला को टाल तू... जैसे जुमले कई बार मदारी, तांत्रिक और झाड़ फूंक वालों से सुने जाते हैं। कोई इसे रूहानी ताकत बताता है तो कोई काला जादू। मकसद सब का एक होता है अनिष्ट की आशंका को खत्म करना। जान कर आश्चर्य होगा कि एफआर इस्लामिया इंटर कॉलेज में बने कोठार में यूपी बोर्ड की कॅपियों को सुरक्षित रखने के लिए भी कुछ इसी तरह के तंत्र मंत्र का सहारा लिया जा रहा है। वहां शिक्षकों ने अपनी जेब में ताबीज रखा है और कोठार में भी धार्मिक कैलेंडर टांग दिया है, उनका मंतव्य बस इतना है कि कोई दुर्घटना न हो।
यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की कॉपियों को रखने के लिए एफआर इस्लामिया इंटर कॉलेज में दो कोठार बने हैं। कोठार एक और कोठार दो। कोठार एक की जिम्मेदारी हसन दानिश और शहजाद अहमद खान को दी गई है। कोठार दो का प्रभार राशिद उल्ला और नवेद उस्मानी के पास है। हसन दानिश ने बताया कि एक बार कोठार से कॉपियों का एक बंडल गायब हो गया था। उसकी वजह से काफी तनाव झेलना पड़ा था। दोबारा ऐसा न हो, इसलिए दुआएं पढ़कर आते हैं और कोठार में धार्मिक कैलेंडर भी लगा दिया है। राशिद उल्ला ने बताया कि वह अपनी जेब में हमेशा ताबीज रखते हैं, जिससे कॉपियां सुरक्षित रह सकें। इन अध्यापकों का कहना है कि कॉपियों के साथ यदि कोई भी घाल मेल हुआ तो बड़ी मुसीबत खड़ी हो जाएगी। इसे टालने के लिए वह हर उपक्रम कर रहे हैं।
मात्र एक कॉपी जांचने के लिए बुलाना पड़ा शिक्षक
पंजाबी भाषा की सिर्फ एक कॉपी आयी जंचने के लिए
बरेली। एफआर इस्लामिया इंटर कॉलेज में इंटरमीडिएट की अंग्रेजी, उर्दू, होमसाइंस की कॉपियों के साथ एक कॉपी पंजाबी की भी जंचने के लिए आई है। मात्र इस एक कॉपी के लिए अलग से परीक्षक को बुलाना पड़ा।
यूपी बोर्ड की कॉपियों का मूल्यांकन लगभग 60 फीसदी हो चुका है। सिर्फ बार मूल्यांकन के लिए 15 दिन का समय दिया गया था, लेकिन यह 15 दिन भी नहीं चलेगा। इससे पहले खत्म हो जाएगा। एफआर इस्लामिया में इंटरमीडिएट की 84 हजार कॉपियों का मूल्यांकन होना था। इसमें उर्दू, होम साइंस, संगीत वादन-गायन और पंजाबी आदि विषयों की कॉपियां आईं। पंजाबी भाषा की मात्र एक कॉपी थी। इस कॉपी को जांचने के लिए गुरुनानक खालसा इंटर कॉलेज की शिक्षक नीलम रानी को बुलाया गया। उन्होंने इस कॉपी का मूल्यांकन किया।