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Bareilly News: जीनोम एडिटिंग से मनुष्य, पशु, पौधों में वांछित गुण विकास और सुधार मुमकिन

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बरेली। डीएनए की खोज से लेकर जीनोम एडिटिंग और क्लोनिंग तक विज्ञान प्रगति पथ पर अग्रसर है। पशुओं के जीनोम में सकारात्मक बदलाव और क्लोनिंग में वैज्ञानिक नियंत्रित संशोधन कर सकते हैं। क्रिस्पर कैस तकनीक से मनुष्य, पशु, पौधों में वांछित गुण और सुधार संभव है।
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भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) इज्जतनगर में बुधवार से ‘बेसिक बायोटेक्नीक्स फॉर जेनेटिक मैनिपुलेशन ऑफ पैथोजेंस’ विषय पर दस दिवसीय प्रशिक्षण के शुभारंभ पर ये विचार संयुक्त निदेशक शैक्षणिक डॉ. एसके मेंदीरत्ता ने साझा किए। कहा-आगामी वर्षों में जीनोम एडिटिंग, आणविक जीव विज्ञान, जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में संभावनाएं बढ़ेंगी। विद्यार्थियों को अनुसंधान के लिए प्रेरित किया। मुख्य अतिथि पीएमई सेल प्रभारी डॉ. जी साईं कुमार ने कहा कि अनुवांशिक विज्ञान की नींव 19वीं सदी में मेंडल ने रखी। वंशागति सिद्धांत को गणित रूप में प्रस्तुत किया। दशकों बाद डीएनए की संरचना की खोज (1953) ने आनुवांशिकी को एक सशक्त वैज्ञानिक अनुशासन के रूप में स्थापित किया।

6 राज्य के 22 प्रतिभागियों को मिलेगा जीन एडिटिंग प्रशिक्षण
कोर्स निदेशक डॉ. पीके गुप्ता के मुताबिक प्रशिक्षण में पंजाब, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, केरल, बिहार, ओडिशा के 22 प्रतिभागी चयनित हुए हैं। जो आईसीएआर प्रायोजित नेटवर्क प्रोग्राम एप्लिकेशन ऑफ जीनोम एडिटिंग टेक्नोलॉजी फॉर इम्प्रूवमेंट ऑफ लाइवस्टॉक हेल्थ एंड प्रोडक्शन के तहत संचालित है। जिसका उद्देश्य जीनोम एडिटिंग तकनीक से पशुधन के स्वास्थ्य और उत्पादन में सुधार लाना है। पशु एवं पोल्ट्री उत्पादन में सुधार के लिए जीनोम एडिटिंग तकनीक का प्रयोग, रोगजनकों के आनुवांशिक नियंत्रण के लिए मूल जैव तकनीकों का अध्ययन, क्रिस्पर कैस प्रणाली से लक्षित जीन संपादन, पशु स्वास्थ्य सुधार के लिए आणविक निदान और वैक्सीन विकास आयोजन का उद्देश्य है। ब्यूरो
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एमएसटीएन जीन का संस्थान कर रहा है अध्ययन
परियोजना के तहत भैंस, भेड़, बकरी, सूअर, मुर्गी जैसे पशुओं में मांसपेशीय वृद्धि के लिए दि मायोस्टेटिन जीन का अध्ययन संस्थान में हो रहा है। जिससे पशुओं की उत्पादन क्षमता में वृद्धि की जा सकेगी। पाठ्यक्रम समवन्यक डॉ. बबलू कुमार ने कहा कि जीनोम प्रसंस्करण, जीनोम मेल्टिंग और पुनर्योगज प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में युवा शोधकर्ताओं के बीच मानसिक प्रतिष्ठा और व्यावहारिक दक्षता का निर्माण करना है। इस दौरान वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आई करुणा देवी, डॉ. सोनालिका महाजन, संयुक्त निदेशक कैडराड डॉ. सोहिनी डे, डॉ. मदन व अन्य वैज्ञानिक मौजूद रहे।
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