बरेली। जेन जी पीढ़ी केवल सोशल मीडिया, प्रदर्शन और पढ़ाई तक सीमित नहीं है। वह सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को संरक्षित कर संवार रही है। शहर में होने वाले रामलीला में किरदार निभाने के लिए इस पीढ़ी के लोग मेहनत से पूर्वाभ्यास कर रहे हैं। परिजन का समर्थन इसमें अहम योगदान दे रहा है।
नेपाल में हुए प्रदर्शन के बाद जेन जी शब्द चर्चा में आया। लोगों ने धारणा बनाई कि यह पीढ़ी सांस्कृतिक चेतना से अलग है। विभिन्न शहरों के 18 से 24 साल के युवा आधुनिक जीवनशैली और शिक्षा के साथ धार्मिक किरदारों की भूमिका निभाकर यह छवि भी तोड़ रहे हैं। बरेली के राजेंद्र नगर में उत्तराखंड सांस्कृतिक समाज की ओर से आयोजित होने वाली रामलीला में जेन जी पीढ़ी ही अधिकतर किरदारों की भूमिका में नजर आ रही है।
मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का किरदार प्रज्ञा कांडपाल निभा रही हैं। उन्होंने बताया कि वह दिन में कॉलेज में पढ़ाई करने के बाद पूर्वाभ्यास के लिए स्थल पर पहुंचती हैं। रामलीला में मंचन के लिए परिवार ने कभी नहीं रोका, बल्कि हमेशा प्रोत्साहित किया। इसी तरह आराध्य माधव रामलीला में लक्ष्मण का किरदार निभाने के लिए जान फूंक रही हैं। वह भी स्नातक की छात्रा हैं। उन्होंने बताया कि एक माह से कॉलेज से लौटने के बाद रोजाना शाम को अभ्यास का समय निकालती हैं।
कैंट और सुभाषनगर क्षेत्रों में होने वाली रामलीला में भी छात्राओं भी भागीदारी रहेगी। यहां वशधरा सागर सती, अनुष्का, इच्छा ठाकुर और काजल - कौशल्या, सुमित्रा और सखी जैसे किरदार निभाएंगी। उन्होंने बताया कि पढ़ाई और आधुनिकता के साथ संस्कृति से जुड़े रहना बेहद जरूरी है, जिससे नई पीढ़ी संस्कारों और इतिहास के बारे में गहनता से जान सके। इसमें परिजन के हौसले और समर्थन का अहम योगदान है।