खुश है जमाना आज पहली तारीख है ये फिल्मी गाना पे डे यानी पगार दिवस पर सबको याद आता है लेकिन इस बार खुशी काफूर थी। केंद्र सरकार के कार्यालयों के अलावा नगर निगम, विकास प्राधिकरण समेत सरकारी विभागों के अफसर और कर्मचारियों की महीने भर की सेलरी खातों में आ चुकी थी। विकास भवन, पीडब्ल्यूडी सहित कई विभागों के कर्मचारियों का वेतन अगले सप्ताह तक उनके खातों में पहुंचने की संभावना है। जिनका वेतन खातों में पहुंचा है वे वेतन निकालने पहुंचे तो कैश की कमी से उनको थोड़ा-थोड़ी कम रकम पर संतोष करना पड़ा, कुछ खाली हाथ ही रहे। अस्पताल में इलाज कराने के लिए भी बैंक 10 हजार से ज्यादा नहीं दे रहे थे। बैंक ऑफ बड़ौदा की विकास भवन शाखा में मात्र पांच लाख कैश था। इस राशि से 125 ग्राहकों को निपटाने को कहा गया। बैंक से हर एक खातेदार को यहां बमुश्किल चार हजार रुपये देकर संतुष्ट किया जा रहा था।
नगर निगम, विकास भवन, पीडब्ल्यूडी समेत सरकारी विभागों में कार्यरत 15 सौ से ज्यादा कर्मचारी खाते से रुपये निकालने के लिए भटकते रहे। बैंकों को पर्याप्त कैश नहीं मिला। खातेदारों को चार, छह या 10 हजार देकर अगले दिन आने के लिए कहकर अपना पीछा छुड़ा रहे थे। नगर निगम की रिटायर्ड एकाउंटेंट सुमन एसबीआई की मुख्य कचहरी शाखा से अपनी मां के इलाज के लिए 24 हजार रुपये निकालने पहुंची। बैंक से 10 हजार ही दिए गए। जब उन्होंने बीमारी की बात की तो शाखा प्रबंधक सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि नगदी इससे ज्यादा की संभव नहीं है। इलाज की बात है तो अस्पताल से फोन पर बात करा दो। उनके खाते में पैसे आपके खाते से ट्रांसफर हो जाएंगे। बीओबी में चार हजार देने पर शाखा प्रबंधक कृष्ण कुमार ने कहा कि कैश कम है। सब ग्राहकों को रुपये देने हैं। इसलिए थोड़े-थोड़े सबको दे रहे हैं। ये दिक्कत दूर होने में कम से कम 10 दिन लगेंगे। पीएनबी, यूको बैंक, विजया बैंक अधिकांश बैंकों में दोपहर दो बजे ही कैश खत्म हो गया।
क्या कहते हैं कर्मचारी
नगर निगम परिसर की सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में मेरा खाता है। पिछले महीने की सेलरी आई तो 20 हजार रुपये निकालने गए थे। बैंक में कैश खत्म होने की बात कह दी गई। जयपाल पटेल, नगर निगम कर्मचारी कल्याण समिति
तीन दिन से घर में रुपये नहीं बचे। किराने का सामान भी नहीं आ पा रहा है। सेलरी आने पर पैसा मिलने की उम्मीद थी लेकिन बैंक में कैश कम होने की वजह से पैसा नहीं मिला। बैंक वालों ने कल आने को कहा है। श्याम मोहन बंसल, कर्मचारी नेता नगर निगम
इस बार सेलरी पर पहले ही रोक लग गई। वह भी बिना मतलब में। अब घर कैसे चलेगा। गलती किसी की। सजा किसी को। ये कहां का न्याय है। शैलेंद्र यादव, कर्मचारी पंचायत राज विभाग
एटीएम में रुपये निकालने नहीं पहुंचे, कैश नहीं था। बैंक में जब तक नंबर आता, तब तक कैश खत्म हो चुका था। कम से कम वेतन तो मिले। नहीं घर कैसे चलेगा। हरीश गंगवार, कर्मचारी डीडीओ दफ्तर
कलक्ट्रेट वालों को तो चार के बाद ही मिलेगा वेतन
कलक्ट्रेट कर्मचारियों को तो चार दिसंबर के बाद ही वेतन का भुगतान नहीं होगा। कलक्ट्रेट कर्मचारियों के आहरण वितरण अधिकारी सिटी मजिस्ट्रेट मनोज कुमार हैं। वह तीन दिसंबर तक अवकाश पर हैं, उनके अवकाश से लौटने के बाद ही कर्मचारियों के वेतन बिल पर हस्ताक्षर करेंगे। उसी के बाद यहां के डेढ़ सौै कर्मचारियों का वेतन बैंक खातों में पहुंचेगा। उसी के बाद वह बैंकों से वेतन निकाल सकेंगे।
कोट --
जमा और निकासी में बराबर सर्कुलेशन नहीं है। बैंकों में पांच सौ और हजार के पुराने नोट जमा हो रहे हैं जबकि सौ, 50, 20 और 10 के नोट वापस नहीं आ रहे। नई करेंसी जितनी मिल रही है। वह बांटी जा रही है। लोग एक बार में इकट्ठे न हों। सुबह और शाम में शिफ्ट बदलकर आएं। बैंकों से पास बुक अपडेट कराने समेत अन्य काम के लिए स्टाफ को परेशान न करें। 10 दिसंबर तक स्थिति सामान्य हो जाएगी। सुनील वढ़ेरा, डीजीएम, एसबीआई
दो हजार के नोट गायब,10, 50 के नोट में मिली सेलरी
बरेली। सेलरी वितरण का वक्त आते-आते चेस्ट बैंकों से दो हजार के नोट भी खत्म हो गए। नतीजतन बृहस्पतिवार को महीने के पहले दिन अधिकांश बैंकों को 10 और 50 के नोट की करेंसी उपलब्ध कराई गई।
पीलीभीत बाईपास पर रुहेलखंड विश्वविद्यालय के सामने स्थित स्टेट बैंक की ग्रीन पार्क ब्रांच में सुबह 12 लाख और दोपहर को 20 लाख रुपये की करेंसी चेस्ट बैंक से भिजवाई गई। सारे नोट छोटे ही थे। एसबीआई की कचहरी स्थित मुख्य ब्रांच में भी दो-दो हजार के नोट बृहस्पतिवार को बहुत कम दिए गए। यहां करेंसी में अधिकांश नोट 10, 20, 50 और सौ के ही थे। इसी तरह एचडीएफसी की सिविल लाइंस और पीलीभीत बाईपास स्थित ब्रांचों में भी छोटे नोट ही खातेदारों को दिए गए। पंजाब नेशनल बैंक की कई शाखाओं में भी दो हजार के नोट बहुत कम दिए गए। आईसीआईसीआई में भी खातेदारों को छोटे नोट ही उपलब्ध कराए गए।
कम आई करेंसी
एसबीआई ग्रीन पार्क में लोगों को अधिकतम 10 हजार रुपये निकालने को कहा गया। मैनेजर विकास कुमार शर्मा ने बताया कि बृहस्पतिवार को आठ लाख रुपये करेंसी कम आई है।
सिविल लाइन सिंडिकेट ने नहीं बाटा कैश
सिविल लाइन की सिंडिकेट बैंक ने आज कैश नहीं बांटा। प्रबंधक ने लोगों धनराशि न होने की बात कहकर लौटा दिया। बैंक से कैश न बंटने के बारे में जानकारी करनी चाही तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। लोगों का कहना था कि एक एक करके परिचितों को बुलाकर यहां का प्रबंध तंत्र कैश दे रहा है।
पीएनबी पीलीभीत बाईपास ब्रांच
दोपहर लगभग साढ़े 12 बजे। पीएनबी पीलीभीत बाईपास में कह दिया गया कि करेंसी खत्म हो चुकी है। बैंक मैनेजर कल के लिए निकासी फार्म पर अपने हस्ताक्षर कर रहे थे लेकिन इस शर्त के साथ कि कल अधिकतम चार हजार रुपये ही मिल पाएंगे और जिनके निकासी फार्म पर मैनेजर के हस्ताक्षर नहीं होंगे, उनके खाते से पैसा नहीं निकलेगा। ब्रांच मैनेजर सुनील कुमार झा ने बताया कि पर्याप्त करेंसी न आने की वजह से सबको पैसा दे पाने से विवश हैं।