जिला प्रशासन ने मिट्टी और बालू खनन पर ठेकेदारों तथा संस्थाओं से रायल्टी ले ली लेकिन आयकर विभाग में टीडीएस की रकम जमा नहीं की। दो महीने पहले आयकर विभाग की टीम ने 2009-10 के खनन अभिलेख खंगाले तभी यह खुलासा हुआ । उसी के बाद 4,87,350 रुपये जमा करने के लिए डीएम एवं जिला खनन अधिकारी के नाम नोटिस जारी किया है। जिसमें कहा है कि 30 दिन के अंदर यह रकम जमा नहीं की तो ब्याज सहित वसूली होगी।
संयुक्त आयुक्त (आयकर) संजीव महाजन की ओर से जारी नोटिस में कहा है कि जिला खनन अधिकारी 30 दिन के अंदर इस राशि को जमा करें। यदि उन्हें आपत्ति है तो वह आयकर आयुक्त के यहां अपील भी कर सकते हैं। उन्होंने आयकर अधिनियम 1965 के नियम 156 के तहत यह नोटिस जारी किया है। खनन विभाग मिट्टी और बालू का खनन की एवज में रायल्टी लेता है।आयकर विभाग के लिए छह से 12 फीसदी तक टीडीएस जमा कराने का प्रावधान भी है। यह जिम्मेदारी जिला खनन अधिकारी की है लेकिन उन दिनों उनके स्तर से टीडीएस जमा नहीं हुआ।
यूपी के मुख्य आयुक्त आयकर की ओर से प्रमुख सचिव खनन और मुख्य सचिव को भारत सरकार के आयकर अधिनियम का उल्लेख करते हुए बरेली सहित प्रदेश के सभी जिलों से खनन से टीडीएस जमा करवाने का अनुरोध किया था। चार साल पहले आयकर विभाग के निर्देश पर प्रमुख सचिव खनन ने प्रदेश के सभी खनन अधिकारी तथा निरीक्षकों की लखनऊ में बैठक बुलाई थी। जिसमें आयकर विभाग के निर्देशों का पालन कराने को कहा था। उनके इन निर्देशों का वर्ष 2009-10 के दौरान बरेली में पालन नहीं हुआ।
‘यह प्रकरण 2009-10 का है, उस दौरान खनन विभाग ने टीडीएस जमा नहीं किया था। इसीलिए आयकर अधिनियम 1961 के सेक्शन 156 के तहत यह नोटिस जारी किया गया है। जिसमें इस रकम को जमा करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है।’ संजीव महाजन, संयुक्त आयुक्त आयकर