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गैस रीफिलिंग मामले में हो गया बड़ा खेलः बड़ा गैस माफिया ठहराया बेकसूर, छोटे को भेजा जेल

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बदायूं। जिले में रसोई गैस रीफिलिंग का धंधा क्या उजागर हुआ कि जिला प्रशासन से लेकर पुलिस विभाग और माननीयों की हकीकत भी सामने आ गई। कानून व्यवस्था बनाए रखने का राग अलापने वाले पुलिस-प्रशासन ने दोहरी नीति का प्रयोग किया। जिले के सबसे बड़े गैस माफिया को मात्र इस बात पर बेकसूर ठहरा दिया गया कि उसने पकड़े जाने पर कहा था कि वह तो गोदाम मालिक है और उसका नौकर किरायेदार है। फिर उसे जेल भेजना तो दूर, उसके खिलाफ रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की गई, जबकि दातागंज रेलवे क्रॉसिंग के नजदीक गैस रीफिलिंग करने वाले के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई, साथ में तीन लोगों को जेल भी भेज दिया गया।
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बीते 10 जनवरी को सिविल लाइंस पुलिस ने लौड़ा बहेड़ी स्थित गैस माफिया के गोदाम से 240 रसोई गैस सिलिंडर बरामद किए थे। साथ में गैस माफिया और उसका नौकर मौके से पकड़ा गया था। दोनों को सिविल लाइंस थाने ले जाया गया था। जहां एक ओर पुलिस उनके तीन एंगल से फोटो करा रही थी, तो वहीं दूसरी ओर पूर्ति विभाग उनके खिलाफ तहरीर तैयार कर रहा था। ये खेल पूरे तीन दिन तक चला। तीसरे दिन पता चला कि पुलिस ने गैस माफिया को छोड़ दिया और उसके नौकर श्याम कुमार अरोरा के खिलाफ न सिर्फ एफआईआर दर्ज कर ली, बल्कि उसे जेल भी भेज दिया। इस पर प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा था कि गैस माफिया ने बयान दिया कि उसने अपना गोदाम किराये पर उठा रखा था। श्याम कुमार अरोरा ही गैस का काला धंधा कर रहा था। इससे गैस माफिया से भी किरायानामा मांगा गया है। तब से न तो माफिया ने किरायानामा दिया है और न ही उसके खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है।
इधर, पांच फरवरी को एसडीएम सदर पारसनाथ मौर्य और जिला पूर्ति अधिकारी रामेंद्र प्रताप सिंह ने दातागंज रेलवे क्रॉसिंग के नजदीक गोदामनुमा घर में छापा मारा, जहां से 161 रसोई गैस सिलिंडर बरामद हुए। यहां रिफिलिंग करने वाले कैलाश उर्फ बंटू समेत चार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। बंटू के तीनों साथियों को पुलिस ने जेल भी भेज दिया है। लेकिन लौड़ा बहेड़ी का माफिया बड़े स्तर पर गैस रिफिलिंग कर रहा था। इसके बावजूद पुलिस और प्रशासन अधिकारियों ने उसे बेकसूर ठहरा दिया, जिससे विभाग और पुलिस की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।
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पहुंच होती तो बंटू भी बच जाता
दूसरे नंबर का गैस माफिया यानी कैलाश उर्फ बंटू ने भी खुद के खिलाफ एफआईआर दर्ज न हो, इसके लिए खूब दौड़भाग की। उसने भी माननीयों तक दौड़ लगाई थी लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाया और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई, जबकि नंबर वन गैस माफिया तिकड़म लगाकर बच गया।
जवाहरपुरी चौकी पुलिस को थी गैस रीफिलिंग की जानकारी
दातागंज रेलवे क्रॉसिंग के नजदीक लाइन किनारे गोदामनुमा घर में किस तरह गैस रीफिलिंग का धंधा चल रहा है, इसकी जवाहरपुरी चौकी पुलिस को अच्छी तरह जानकारी थी। सूत्रों के मुताबिक चौकी इंचार्ज के पास प्रत्येक माह पैसा पहुंचता था। एसडीएम और जिला पूर्ति अधिकारी के छापे के दौरान चौकी इंचार्ज से मदद मांगी गई थी। लेकिन अधिकारी मौके पर पहुंचते, उससे पहले माफिया मौके से भाग गया। इससे चौकी इंचार्ज की भूमिका भी संदिग्ध लग रही है।
गैस रीफिलिंग के मामले में जो भी कार्रवाई हुई है, वो पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने की है। उन्होंने किसे छोड़ा और किसे नहीं छोड़ा, ये पुलिस जाने। वैसे इस मामले की विवेचना तो चल ही रही है। जो भी सच होगा, सबके सामने आ जाएगा।
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- महेश चंद्र गुप्ता, नगर विकास राज्यमंत्री
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