शहर के व्यस्त चौकी चौराहा पर बृहस्पतिवार को गैस से संचालित प्राइवेट एंबुलेंस में अचानक आग लग गई। एंबुलेंस से आग की लपेट उठते देख इधर से गुजरने वाले लोग हादसा होने की आशंका में सहम गए, लेकिन ऐन वक्त पर पहुंची दमकल टीम ने आग को बुझा दिया। जिससे हादसा बच गया। शुक्र रहा कि एंबुलेंस में कोई सवार नहीं था। पुलिस एंबुलेंस में आग वायर स्पार्किंग से होना बता रही है।
मारुति वैन को एंबुलेंस का लुक देकर गंभीर मरीज जल्द अस्पताल पहुंचाने का बहाना बनाकर तेजी से दौड़ाया जा रहा है। यह एंबुलेंस कम खर्च में चलाने को गैस का उपयोग किया जा रहा है, जिससे इस तरह न ही वाहन सुरक्षित है और न उनमें बैठने वाले लोग। ऐसी ही गैस से ही संचालित एंबुलेंस नंबर (यूपी 25-5952) में बृहस्पतिवार को आग लग गई। इस एंबुलेंस में सीएनजी किट लगी थी। चालक और एक अन्य व्यक्ति ने जैसे ही आग लगते देखा तो वह गाड़ी से उतरकर भाग लिए। आग की सूचना पर पहुंची दमकल टीम ने जल्द ही काबू कर लिया, अन्यथा और बड़ा हादसा हो सकता था।
एंबुलेंस वालों का चलता है कमीशन का खेल
निजी एंबुलेंस का पूरे शहर के अस्पतालाें के साथ कमीशन बंधा हुआ है। इसमें चौराहों पर और हाइवे चौकी पर बैठने वाले पुलिस कर्मी भी शामिल हैं। हादसा होने पर पुलिस कर्मी सीधे पास खड़ी रहने वाली एंबुलेंस को बुलाता है। गंभीर मामलों में तो पुलिस की तेजी एक हद तक ठीक है, लेकिन मामूली दुर्घटनाआें में भी घायल सरकारी अस्पताल नहीं पहुंचता।
- कहां से आई इतनी एंबुलेंस
शहर में एक हजार से अधिक एंबुलेंस घूम रही हैं। जबकि आरटीओ कार्यालय में 109 एंबुलेंस ही शहर में पंजीकृ त हैं। जिन अस्पतालों के बाहर छह से आठ एंबुलेंस खड़ी होती है उनके नाम पर भी केवल दो से चार एंबुलेंस ही पंजीकृत हैं। इनकी जांच नहीं होती है, ये टैक्स फ्री होते हैं। आज तक एक भी एंबुलेंस की जांच नहीं हो पाई है।
- ये हैं नियम
एंबुलेंस किसी भी व्यक्ति के नाम पंजीकृत नहीं हो सकती। मालिक को निशुल्क सेवा का शपथ पत्र देना होता है। यह केवल मरीजाें के प्रयोग में लाई जाती है। लेकिन असलियत में एंबुलेंस आरटीओ में पंजीकृत नहीं है। जो एंबुलेंस चल रही है उसमें न तो स्टाफ है और न ही सुविधा। ये मरीजों से खूब पैसा ले रहे हैं। शहर के ही अस्पताल में ले जाने का 800 से 1200 रुपये लेते हैं।
वर्जन--
‘एलपीजी गैस किट पर एहतियात के तौर पर रजिस्ट्रेशन नहीं कर रहे हैं। सीएनजी में रजिस्ट्रेशन है। एंबुलेंस भी इसी दायरे में है। इनकी फिटनेस होती है।’
आरआर सोनी, आरटीओ