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रुपये हड़पने की खातिर फूट पड़ी तो पकड़ा गया अंतरराष्ट्रीय हवाला तस्करों का गैंग

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साइबर धोखाधड़ी - फोटो : social media
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तस्करों के साथ कार में मौजूद कथित रिपोर्टर ने अमर उजाला को बताई हकीकत
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बिथरी के दरोगा व सिपाहियों पर होगी कार्रवाई, बड़े गुडवर्क में जुटी बरेली पुलिस
बदायूं से जुड़े गैंग व नाइजीरियन दोस्तों की तलाश में क्राइम ब्रांच दे रही दबिश

बरेली। रुपये हड़पने की कोशिश में आपसी फूट के बाद हुए कोहराम से बिथरी चैनपुर पुलिस की पकड़ में आए हवाला तस्करों के पूरे गैंग को पकड़ने में बरेली पुलिस और क्राइम ब्रांच दबिशें दे रही है। बड़े खुलासे के साथ ही अफसर रुपये के बंदरबांट में लगे पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के मूड में हैं। पुलिस तीन आरोपियों से पूछताछ कर छापे मार रही है तो कथित रिपोर्टर व ड्राइवर को प्रारंभिक दोष न मिलने पर छोड़ दिया गया। बदायूं में अमर उजाला टीम को मिले इसी रिपोर्टर ने घटनाक्रम की सिलसिलेवार जानकारी दी।
बदायूं की बिसौली कोतवाली के हवाला को चर्चित गांव संग्रामपुर निवासी तारिक कई साल से मुंबई के पालघर में रहकर एक वेब पोर्टल का रिपोर्टर है। बरेली पुलिस से छूटकर बदायूं आए तारिक ने बताया कि उसके गांव का ही तस्कर इमरान और ड्राइवर बबलू के साथ इमरान के बहनोई की जायलो गाड़ी में शुक्रवार दोपहर बिथरी के उड़ला जागीर का वाजिद व रियासत अमरोहा के जोया तक गए थे। दरअसल उसके पिता दमा के मरीज हैं और उसे इनहेलर व दवा लेने बरेली जाना था। इमरान ने उससे कहा कि किसी काम से बरेली जा रहे हैं तुम वहां से दवा ला सकते हो।
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उड़ला वाले लोग इन्हें मिले और रियासत ने इमरान के खाते से साढ़े छह लाख रुपये निकाले। इमरान को छोड़ यह लोग दिल्ली की ओर निकले। उसे भनक भी नहीं थी कि यह लोग रुपये दिल्ली में नाइजीरियन ठगों को देने जा रहे थे। इस बीच जोया टोल प्लाजा के पास रियासत ने अपना नंबर स्विच ऑफ किया और अपने घरवालों के जरिये इमरान के पास सूचना भेजी कि उनकी गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ है और रुपये भरा बैग कोई उठा ले गया। बाद में सिर पर पट्टी कराकर रात में वह अपने गांव आ गया।
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यहां परिवार के लोग रो रहे थे। तभी इमरान और वाजिद ने आकर झगड़ा शुरू कर दिया। आरोप लगाया कि रुपये हड़पने की साजिश की जा रही है। रात 12 बजे मारपीट और हंगामे की सूचना बिथरी पुलिस को मिली तो दरोगा संजय त्यागी, सिपाही गौरव, राहुल व इफ्तेखार खां पहुंच गए और उसके समेत पांचों लोग, रुपये व कार थाने ले गए। थाने में इंस्पेक्टर नहीं थे। तब इन लोगों ने रुपया बांट लिया और केवल 1.37 लाख रुपया बरामदगी दिखाने की कार्रवाई करने लगे। किसी सिपाही ने इंस्पेक्टर को सूचना दी। उन्होंने आकर नाराजगी जताई पर पुलिसकर्मी न माने। उन्होंने अफसरों को इस बारे में बताया और शनिवार को एएसपी अभिषेक वर्मा ने सभी को फटकार लगाई। उन लोगों को बरेली ले आए। सभी के बयान लिए। उसका भी मुंबई से रिकार्ड निकलवाया। उसे और ड्राइवर का दोष न होने पर छोड़ दिया। इमरान, वाजिद व रियासत से पुलिस पूछताछ कर रही है।

हवाला धंधे से जुड़े गैंग को पकड़ने की जानकारी मिली है। एसएसपी बरेली को बताया है कि इसकी पूरी रिपोर्ट बनाकर दें। बदायूं या दूसरे जिलों के लोग जुड़े होंगे तो वहां भी दबिश और कार्रवाई कराई जाएगी।

- राजेश कुमार पांडेय, डीआईजी बरेली रेंज

दबतोरी से दिल्ली होकर नाइजीरिया तक फैला जाल

बदायूं से दबतोरी क्षेत्र के संग्रामपुर व लक्ष्मीपुर गांव हवाला कारोबारियों के गढ़ हैं। यहां पंद्रह साल पहले गरीब मजदूर रहे लोग अब करोड़पति हैं। इनका काम ग्रामीणों के खाते खुलवाकर विदेशों से लोगों की रकम मंगाना और फिर उन्हें तीन से पांच फीसदी कमीशन काटकर दूसरी जगह पहुंचाना है। करोड़ों की रकम में दिन भर में लाखों का खेल हो जाता है। लॉटरी व दूसरे तरीके से ठगी करने वाले नाइजीरियन भी इन लोगों के खुलवाए खातों में रकम ट्रांसफर करके निकलवाते हैं। इन्हीं लोगों के दूरदराज शहरों में फैले रिश्तेदार व परिचित इस धंधे से जुड़कर अमीर हो गए हैं। बरेली के सदाकत व उसका गैंग लखीमपुर खीरी में टेरर फंडिंग के जिस घंधे में पकड़ा गया, वह भी हवाला का ही कारोबार है।

लॉकडाउन ने तोड़ी हवाला धंधे की कमर

हवाला धंधे की पूरी जानकारी रखने वाले तारिक ने स्वीकार किया कि कोरोना की वजह से इस धंधे की कमर टूट गई है। लोगों के खाते में रुपये आ भी रहे हैं तो निकासी में दिक्कत आ रही है। एक से दूसरी जगह जाने पर भी बंदिश है। ऐसे में मुंबई व दिल्ली के महिपालपुर आदि स्थानों पर रहकर ठगी व ऑनलाइन ट्रांजिक्शन करने वाले धंधेबाज अपने गांवों में आकर रह रहे हैं। इनके महंगे शौक पूरे नहीं हो रहे तो आपस में ही एकदूसरे के रुपये उड़ाने लगे हैं। बिथरी की घटना की वजह भी यही थी।

महाराष्ट्र पुलिस के छापे के बाद से सक्रिय था दीवान

एसएसपी मुनिराज जी. के कार्यकाल के अंतिम दिनों में महाराष्ट्र पुलिस ने जिले में कई दिन डेरा डाला था। उसे अपने यहां बैंक की साइट हैक करने वाले उड़ला के तस्कर की तलाश थी। बरेली क्राइम ब्रांच ने साइबर सेल के साथ मिलकर आरोपी पकड़कर महाराष्ट्र पुलिस को सौंप दिया। बिथरी थाने का एक दीवान इस पूरे घटनाक्रम में साथ रहा था। तभी से वह इस गैंग के लोगों के संपर्क में था। इनके बिथरी क्षेत्र में आते ही वह सक्रिय हो जाता था। सूत्र बताते हैं कि वह गैंग को संरक्षण देने के नाम पर मोटी रकम वसूलता था। जानकार यह भी बताते हैं कि कई जिलों के थानेदारों व अधिकारियों से गैंग के लोगों का संबंध है। इनके मोबाइल को सही से ट्रेस किया जाए तो बड़े भेद खुल सकते हैं।
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