सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बंद होने के बाद शहर से प्रतिदिन निकलने वाले करीब 350 मीट्रिक टन कूड़ा बाकरगंज भेजने की बात जरूर की जा रही है, लेकिन हकीकत इससे उलट है। नगर निगम में 68 डलावघर पंजीकृत हैं, जिनमें बहुत से कवर्ड नहीं हैं। सवा सौ से ज्यादा डलावघर अनाधिकृत हैं। पीलीभीत बाईपास, बदायूं रोड, साहूकारा, हजियापुर, सुभाषनगर, संजय नगर, मढ़ीनाथ, फरीदापुर चौधरी और सीबीगंज में सड़कों, गलियों और खाली प्लाटों में कूड़े के ढेर जमा हैं। ये बाकरगंज से कम नहीं हैं। ज्यादातर खाली प्लाटों में डेयरी का गोबर जमा होने से शहर का बड़ा इलाका नरक बना हुआ है। पुराना शहर, कालीबाड़ी, बानखाना, सूफी टोला, खुर्रम गौंटिया, कोहाड़ापीर, सिकलापुर, आलमगिरी गंज इलाकों में गोबर से नालियां चोक हैं। ये किसी नरक से कम नहीं। तो क्या गोबर, गंदगी और कूड़े के ढेर पर शहर स्मार्ट बनेगा ?
‘नगर निगम के ज्यादातर डलावघर कवर्ड हैं। जागरूकता के अभाव में लोग डलावघर के बाहर या खाली प्लाटों पर कूड़ा फेंक देते हैं। सफाई कर्मचारी कूड़ा डंप नहीं करते। प्लांट न चलने तक शहर का कूड़ा बाकरगंज भेजा जा रहा है। कहीं कूड़े के ढेर जमा हैं तो उनको हटवाया जाएगा।’ शीलधर सिंह यादव, नगर आयुक्त