एफएसडीए की लापरवाही से नियम कायदे पर व्यापार कर रहे तेल व्यापारी परेशान, तस्करी वाले मौज में
बरेली। मिलावट और घटतौली के साथ अब विदेशी खाद्य तेल का खेल बाजार में खुले आम चल रहा है। लंबे समय से चल रहे इस कारोबार से खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन (एफएसडीए) भी अनभिज्ञ था। इसके साथ ही नेपाल से आयातित खाद्य तेल इस्तेमाल करने में कितना सुरक्षित है इसका आभास विभागी अफसरों को नहीं है। श्यामगंज मंडी में लगे छापों के बाद सैंपलिंग हुई है, इसकी लैब रिपोर्ट दो सप्ताह से पहले आना संभव नहीं है। जबकि कारोबार हजारों टन नेपाली तेल खपा चुके हैं।
विदेशी खाद्य तेल में बड़ा मार्जिन यानी मुनाफा होने से आसानी यह कारोबार गली-गांव तक अपनी पहुंच बना चुका है। इससे लोकल उत्पाद बाजार तीस प्रतिशत ही रह गया है। यानी 70 प्रतिशत से ज्यादा बाजार पर नेपाली खाद्य तेल छाया हुआ है। इससे साफ जाहिर है कि बड़े स्तर पर नियोजित तरीके भारतीय अर्थ व्यवस्था को चौपट किया जा रहा है। मुनाफाखोरों ने ऐसी स्थिति कर दी है कि मंडी से छोटे-छोटे उत्पादक धीरे-धीरे कारोबार से आउट होने की स्थिति में आ चुके हैं। उधर, सस्ते के चक्कर में नेपाली खाद्य तेल धड़ल्ले बिक रहा है।
रिटेलर बताते हैं कि उन्हें 50 रुपये तक आसानी से बच जाते हैं जबकि लोकल ब्रांड में बमुश्किल दस रुपये की बचते हैं। लेकिन नेपाली तेल कितना सुरक्षित है और उस पर लगे लेबल के अनुसार उत्पाद है या नहीं यह सब उनका सिरदर्द नहीं है। विदेश से जब तेल आ रहा है तो ठीक ही होगा। इसे चेक करने आदि की जिम्मेदार संबंधित सरकारी विभागों की होती है। दुकानदारों ने बताया कि नेपाली तेल में मार्जिन इतना है कि लोकल उत्पादक उस दर पर सप्लाई नहीं दे सकता है। इसलिए गली-गांव तक विदेशी तेल उपभोक्ताओं में अपनी घुसपैठ बना चुका है। ग्राहक भी सस्ता खाद्य तेल मांगता है। उसे यह पता नहीं होता है कि सस्ते की चक्कर क्या खा रहा है।