बरेली। मुनाफाखोर किचन तक मसाला, मिर्च, हल्दी ही बल्कि मिलावटी और केमिकल से रंगी सब्जियां भी पहुंचाने में कामयाब हो गए हैं। खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने पेयजल के बाद इन सब्जियों की ओर रुख किया है। थोक सब्जी मंडी पहुंची टीम ने सैकड़ों किलो संदिग्ध और खराब सब्जियां मौके पर ही नष्ट करा दीं। केमिकल से अदरक साफ करने का मामला भी पकड़ में आया, लेकिन आढ़ती टीम देख चुपचाप खिसक लिया। विभाग ने आढ़त सीज कर नोटिस चस्पा कर दिया है।
गुरुवार सुबह एफएसडीए टीम डेलापीर स्थित थोक सब्जी व फल मंडी पहुंची। वहां हर तरफ गंदगी और बदबूदार सब्जियों की भरमार थी। कई आढ़तों पर खराब और केमिकलयुक्त सब्जियां की भरमार थी। एफएसडीए सहायक आयुक्त संजय पांडे के नेतृत्व में पहुंची टीम की जानकारी मिलते ही आढ़तियों में अफरातफरी मच गई। उन्होंने अपने स्टाक को उधर-उधर करने की कोशिश की, लेकिन समय कम होने से ऐसा नहीं कर पाए। जिला अभिहित अधिकारी धर्मराज मिश्रा और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने बड़ी हरी मिर्च और बीन के दो नमूने संग्रहित किए। लाल एंड कंपनी के लाल भाई निवासी हजियापुर की आढ़त से 1960 किलो दूषित बैंगन, जिसकी कीमत लगभग दस हजार बताई गई, उसे मौके पर ही नष्ट करा दिया। टीम ने 200 किलो ग्राम शिमला मिर्च, सौ किलो कद्दू, 700 किलो फूल गोभी, सौ किलो करेला आदि जब्त कर नष्ट कर दिया। साथ ही खराब और संदिग्ध सब्जी बेचने वालों को नोटिस भी जारी किए गए हैं।
केमिकल से तैयार अदरक भी पकड़ी
मंडी में रात में ही तेजाब और केमिकल से सब्जियां तैयार होने लगती हैं। एक आढ़त में बड़ी मात्रा में अदरक बरामद हुई, साथ ही केमिकल और तेजाब भी मिला। छापा टीम की आने की खबर मिलते ही आढ़ती चैनल बंद कर भाग गया। टीम ने यहां केमिकल और अदरक के नमूने भरे और आढ़त सीज कर नोटिस चस्पा कर दिया।
केमिकल सब्जियां मंडी कैसे पहुंची ?
मंडी परिषद की जिम्मेदारी होती है कि मंडी आने वाले खाद्यान्न, सब्जी और फलों की गुणवत्ता आदि की जांच करे, लेकिन मिलीभगत के चलते ऐसा नहीं होता है। गुणवत्ता तो चेक करना अलग केमिकल तक मंडी में मौजूद हैं। इसका खुलासा एफएसडीए छापा कार्रवाई में हुआ। सहायक आयुक्त संजय पांडे बताते हैं कि मंडी अफसर अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहे हैं, जिससे मुनाफाखोर फल-सब्जी में भी मिलावट करने से बाज नहीं आ रहे हैं। छापा टीम के पहुंचते ही वहां आढ़तियों ने ज्यादातर खराब सब्जी फेंक दी थी। गरीब लोग और गलियों में सब्जी बेंचने वाले लोग उसे बीनने जुटे थे। बैंगन और गोभी आदि दूर से ऐसी लग रही थी, खाने योग्य नहीं थी, फिर आढ़त परिसरों में ऐसा माल बड़ी मात्रा में भरा पड़ा था।