कस्बा धौराटांडा का मामला, इलाज को अस्पताल ले जाते समय मौत
भोजीपुरा (बरेली)। सूदखोरों के चंगुल में फंसे कस्बा धौराटांडा के युवा फल विक्रेता 22 वर्षीय इंतखाब अली ने शुक्रवार को जहरीला पदार्थ खा लिया। परिवार वाले उन्हें लेकर बरेली दौड़े लेकिन रास्ते में ही मौत हो गई। सप्ताह में सूदखोरों के आतंक की ये तीसरी घटना है लेकिन पुलिस अब भी उन पर शिकंजा नहीं कस रही है।
भोजीपुरा के कस्बा धौराटांडा में वार्ड आठ निवासी इंतखाब अली कस्बे में ही फल का ठेला लगाते थे। परिजन के मुताबिक शुक्रवार शाम करीब पांच बजे वह ठेले के पास ही बेहोशी की हालत में मिले। सूचना पर वहां पहुंचे परिवार वाले उन्हें बरेली ले गए, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई। शव राममूर्ति मेडिकल कॉलेज की मोरचरी में रखवा दिया गया। शनिवार सुबह पंचनामा भरकर पुलिस ने शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। पोस्टमॉर्टम में जहर से मौत होने की पुष्टि हुई है। विसरा सुरक्षित किया गया है।
प्रधान और सूदखोर पर पकड़कर ले जाने का आरोप
पोस्टमॉर्टम हाउस पर इंतखाब के भाई इंतजार अली ने बताया कि एक सूदखोर से इंतखाब ने 20 हजार रुपये का कर्ज लिया था। पांच प्रतिशत ब्याज दर के हिसाब से उन्होंने मूल समेत सारे रुपये चुका दिए। इसके बावजूद सूदखोर उन पर रुपये बकाया बता रहा था और आए दिन उन्हें प्रताड़ित करता था। उन्होंने आरोप लगाया कि दो दिन पहले सूदखोर एक प्रधान के साथ भाई के ठेले पर पहुंचा और उन्हें पकड़कर ले गया। आरोप लगाया कि उसने ही मारपीट करके उन्हें जहरीला पदार्थ खिलाकर ठेले के पास छोड़ दिया।
शाम को परिजन ने चुप्पी साधी
दोपहर में पोस्टमॉर्टम हाउस पर सूदखोर और प्रधान पर आरोप लगाने वाले परिजन शाम को इस मामले में चुप्पी साध गए। पोस्टमॉर्टम के बाद उन्होंने इंतखाब के शव को सुपुर्दे खाक भी कर दिया। जब उनसे बात की गई तो उन्होंने रविवार को स्थिति स्पष्ट करने की बात कही।
फल बेचकर अदा कर रहे थे जैकेट के कारोबार का कर्जा
परिजन ने बताया कि कुछ साल पहले इंतखाब ने थोक में जैकेट खरीदकर बेचने का काम शुरू किया था। इस व्यापार में उन्होंने कर्ज लेकर रुपये लगाए थे और उसे अदा करने के चक्कर में सात-आठ लोगों के कर्जदार हो गए। इसके बाद उन्होंने फल बेचने का काम शुरू किया था। परिजन का आरोप है कि फल बेचकर भी इंतखाब जैकेट के कारोबार को लेकर हुआ कर्ज ही अदा कर रहे थे। सूदखोर उन्हें लगातार परेशान कर रहे थे, जिससे वह अवसाद में थे।
एक सप्ताह में हुई तीसरी घटना
सूदखोरों के उत्पीड़न के चलते इस सप्ताह में यह तीसरी घटना है। इससे पहले 28 जून को राजेंद्रनगर में सूदखोरों से अपमानित होने की वजह से ट्रांसपोर्टर की बेटी ने फंदा लगाकर जान देने की कोशिश की थी। उसके अगले दिन मीरगंज के गांव संजरपुर हेडमास्टर चंद्रपाल ने जहर खाकर खुदकुशी कर ली थी।