फर्जी पते पर सेना में भर्ती होने वाले लड़कों के असली पतों की तस्दीक पुलिस उनके शैक्षिक प्रमाण पत्रों के आधार पर स्कूल-कॉलेजों और बोर्ड ऑफिस में जाकर भी कर सकती थी। विवेचना बदलने के बाद क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर ने भी इसके लिए प्रयास नहीं किए। इससे नाराज डीआईजी आरकेएस राठौर ने सोमवार को विवेचक को बुलाकर इस मामले में प्रगति पूछी तो उनका जवाब था कि उनके पास हाल ही में विवेचना आई है। वह ये भी नहीं बता पाए कि आरोपियों का असली पता लगाने के लिए क्या किया। इस पर डीआईजी ने उनकी जमकर क्लास ली और आरोपियों का जल्द पता लगाने को कहा। कोर्ट से परमीशन लेने के बाद विवेचक जेल पहुंचे। उन्होंने आरोपियों के बयान फिर से लिए लेकिन असली पता किसी से नहीं उगलवा पाए। जिला आगरा के थाना बरहन के गढ़ी सहजबा के रहने वाले विश्वेंद्र उर्फ बबलू ने ही विवेचक को अपना असली पता बताया। वह शिवपुरी, मीरगंज के पते पर भर्ती हुआ है। बदायूं में बिसौली के पते पर सेना में भर्ती होने वाले सचिन कुमार के गाजियाबाद में रहने वाले मामा के पते के आधार पर पुलिस सचिन का असली पता लगाने में जुटी है। मास्टर माइंड आदेश गूजर और एक रिटायर सैन्य अधिकारी की भी पुलिस ने तलाश शुरू कर दी है। क्राइम ब्रांच के प्रभारी इंस्पेक्टर राजीव शर्मा ने बताया कि फर्जी पते पर सेना में एंट्री करने वालों के सही पता लगाने के लिए टीम को लखीमपुर भेजा जा रहा है। कुछ लड़कों ने उन्नाव और रायबरेली के स्कूलों, कॉलेजों के शैक्षिक प्रमाण पत्र लगाए हैं। उन स्कूल, कॉलेजों से ही आरोपियों को असली पता लगाने की कोशिश की जा रही है।