बरेली। बेरोजगारों से सेना व पुलिस भर्ती के नाम पर ठगी की जा रही है। जिले में पिछले दिनों सेना और पुलिस में भर्ती कराने के नाम पर ठगी के कई मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ शिकायतें आती हैं तो आरोपियों की गिरफ्तारी भी होती है। इसके बाद भी धोखाधड़़ी के मामले में हल्की धाराओं की वजह से उनको थाने से ही नोटिस तामील कर आसानी से जमानत दे दी जाती है। इसके बाद ठग वादी और पुलिस को साधकर बचने का रास्ता निकाल लेते हैं।
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विक्की मंडल छूटा तो मची थी हायतौबा
पिछले साल सितारगंज (उत्तराखंड) निवासी विक्की मंडल ने कैंट क्षेत्र में कई युवकों को लाखों रुपये का चूना लगाया था। कैंट पुलिस और सेना इंटेलीजेंस को सूचना मिली तो काफी मशक्कत के बाद विक्की की गिरफ्तारी की गई। कुछ अभ्यर्थियों ने उसके खिलाफ कैंट थाने में रिपोर्ट कराई। एक दरोगा ने धोखाधड़ी की धाराओं में सात साल से कम सजा होने का तर्क देते हुए नोटिस तामील कराकर उसे छोड़ दिया। इसे लेकर उस वक्त सेना इंटेलिजेंस ने पुलिस के अधिकारियों से शिकायत की थी। रिपोर्ट कराने वाले अभ्यर्थी भी आरोप लगाने लगे, हालांकि बाद में मामला ठंडा पड़ गया।
मुश्ताक को भी नोटिस देकर छोड़ा
सोमवार को बदायूं निवासी मुश्ताक को सेना में भर्ती कराने का झांसा देकर ठगी करने की कोशिश में पकड़ा गया था। उसके खिलाफ बेरोजगार युवक ने तहरीर दी तो कैंट थाने में मामला दर्ज किया गया। धाराओं में सात साल से कम सजा होने के कारण नोटिस तामील करवाकर उसे भी छोड़ दिया गया।
पुलिस को देनी पड़ती है जमानत
सात साल से कम सजा वाली धाराओं में पुलिस थाने में फाॅर्म 41 भरवाकर जमानत दे देती है। पुलिस का तर्क है कि वह चाहकर भी इन धाराओं में आरोपी को जेल नहीं भेज सकती क्योंकि ऐसा करने पर कोर्ट में फटकार भी लग जाती है। हालांकि, कई स्पेशल एक्ट में कम सजा होने के बाद भी पुलिस बरामदगी के आधार पर आरोपी को जेल भेज देती है।
ऐसे मामलों में पीड़ित या फिर सेना की ओर से दी गई तहरीर के आधार पर पुलिस कार्रवाई करती है। तहरीर की शब्दावली के मुताबिक ही धाराएं लगती हैं। धारा 420 या 406 लगने पर सात साल से कम की सजा का प्रावधान है, इसलिए नोटिस तामील कराकर आरोपी को छोड़ा जाता है। धोखाधड़ी से संबंधित अन्य धाराएं साथ में लगने पर आरोपी को जेल भेजा जा सकता है। - राहुल भाटी, एसपी सिटी
सात साल से कम सजा वाले मामलों में पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर जेल नहीं भेज सकती, इसलिए फाॅर्म 41 भरवाकर थाने से जमानत दे दी जाती है। यदि पुलिस को अंदेशा होता है कि आरोपी जमानत का दुरुपयोग कर भविष्य में अपराध कर सकता है तो वह सेक्शन 52 के तहत आरोपी को गिरफ्तार भी कर सकती है। - नरेंद्र कुमार मिश्रा, वरिष्ठ अधिवक्ता फौजदारी