बीसलपुर। बीसलपुर-शाहजहांपुर हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण में घपलेबाजी का मामला सुर्खियों में आया तो जांच समिति गठित कर दी गई। इसकी भनक लगते ही जालसाजों ने भूखंडों पर बने अस्थायी ढांचे हटाने शुरू कर दिए। जांच टीम निरीक्षण के लिए पहुंची तो कई भूखंडों पर कोई अस्थायी निर्माण नहीं मिला।
डीएम की ओर से गठित जांच समिति के सदस्य एसडीएम नागेंद्र पांडेय और एनएचएआई के सहायक अभियंता ने कई गांवों में जाकर स्थलीय निरीक्षण किया, लेकिन उन्हें ढांचे नहीं मिले। एक ग्रामीण ने बताया कि हाईवे की अधिसूचना जारी होने के बाद से ही जमीन की खरीद-फरोख्त को लेकर रुद्रपुर, बरेली, मेरठ, लखनऊ आदि शहरों के माफिया ने स्थानीय लोगों से संपर्क करना शुरू कर दिया था। जमीन खरीदकर माफिया ने सर्वे शुरू होने से पहले ही स्थायी व अस्थायी निर्माण करा लिए। इस आशय की शिकायत तत्कालीन डीएम से भी की गई थी। तब कुछ लोगों को नोटिस भी जारी हुए थे, पर डीएम के तबादले के साथ ही मामला ठंडे बस्ते में चला गया था।
वर्जन
स्थलीय निरीक्षण किया गया था। इस सप्ताह जांच रिपोर्ट डीएम को सौंप दी जाएगी। - नागेंद्र पांडेय, एसडीएम
रिंग रोड मामले की सुनवाई अब पहली अक्तूबर को
बरेली। रिंग रोड के लिए सरनिया में अधिक मूल्यांकन के मामले में एनएचएआई के आर्बिट्रेशन पर सुनवाई एक बार फिर टल गई है। अब पहली अक्तूबर को इस पर सुनवाई होगी है।
एनएचएआई को बरेली में रिंग रोड बनाना है। इसके लिए जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। जमीन और परिसंपत्तियों का जो मूल्यांकन एनएचएआई की ओर से नामित निजी कंपनी ने किया है, उस पर सवाल उठ रहे हैं। एनएचएआई ने डीएम की अदालत में आर्बिट्रेशन दायर किया था। सरनिया के गाटा 156 पर स्थित जिस संपत्ति के मूल्यांकन पर सवाल उठ रहे हैं, उस गोदाम का पहली बार 2.95 करोड़ रुपये मूल्यांकन किया गया था। जांच बैठी तो लोक निर्माण विभाग के मौजूदा अधिशासी अभियंता ने इसी गोदाम का मूल्यांकन 30 लाख रुपये से कम कर दिया। अब तीसरी बार लोक निर्माण विभाग के एनएच खंड के अधिशासी अभियंता शशांक भार्गव और पीएमजीएसवाई खंड के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार को मूल्यांकन की जिम्मेदारी दी गई है। दोनों अभियंता मौके का निरीक्षण कर चुके हैं, पर अभी मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार नहीं हुई है। ब्यूरो