बरेली। पॉवर कारपोरेशन में 2268 करोड़ रुपये का ईपीएफ घोटाले में शामिल अफसरों पर सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर जेई संगठन ने भी आंदोलन शुरू कर दिया है। वक्ताओं ने कहा कि विभागीय भविष्य निधि ट्रस्ट ने नियमों को अनदेखा कर निजी फर्म में भारी भरकम निवेश कर दिया, जबकि यह धनराशि कर्मचारियों की है। संगठन ने डीएचएफएल में अवैध रुप से की गई निवेश राशि वापस करने की मांग की है।
बुधवार शाम जेई संगठन कार्यालय में हुई बैठक में आरके झा ने ईपीएफ घोटाले के लिए शीर्ष प्रबंधन को दोषी ठहराया। एमए खान और हरिओम ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार घोटाले में शामिल आईएएस अफसरों को बचा रही है, जबकि छोटे रिटायर्ड अधिकारी जेल में डाले जा रहे हैं। एमडी और चेयरमैन के तबादले कर भ्रम फैलाया जा रहा है। संगठन पदाधिकारियों ने ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग की है।
उधर, विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने दूसरे दिन भी चीफ इंजीनियर कार्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। इस मौके पर आयोजित सभा में संयोजक रंजीत चौधरी ने कहा कि ईपीएफ राशि निवेश घोटाला और ट्रस्ट प्रमुख अब भी अपनी कुर्सी पर जमे हैं। उन्होंने कहा कि कारपोरेशन चेयरमैन इसके लिए पूरी तरह दोषी हैं, उनकी भी गिरफ्तारी जरूरी है। इस मौके पर चीफ इंजीनियर तारिक मतीन, एसई एनके मिश्रा, तारिक जलील, एक्सईएन उमेश सोनकर, सुशील गर्ग, राजेश शर्मा आदि मौजूद रहे।