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फाइनेंस कंपनियों को लाइसेंस देकर निगरानी भूल जाती है सरकार

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बरेली। तमाम फर्जी फाइनेंस कंपनियां धोखाधड़ी करके पब्लिक को चूना लगा रही हैं। ये फाइनेंस कंपनियों जैसे-तैसे लाइसेंस तो ले लेती हैं लेकिन निगरानी न होने से उन पर कोई शिकंजा नहीं कसा जा पा रहा है। ऐसे मामले में पीड़ित शिकायतें भी करते हैं तो पुलिस उन पर ध्यान नहीं देती है।
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वर्ष 1990 से 1995 के बीच ऐसी कई फाइनेंस कंपनियां सक्रिय हुई थीं। ये कंपनियां सरकारी बैंकों के मुकाबले डेढ़ से तीन प्रतिशत तक ज्यादा ब्याज देने सहित कई लुभावनी स्कीमें बताकर लोगों को निवेश करने के लिए प्रेरित करती हैं। बाद में जैसे ही उनके पास करोड़ों रुपये इकट्ठा होते हैं, वे सारा धन समेटकर रफूचक्कर हो जाती हैं। पहले भी तमाम कंपनियों ने ऐसा किया था। उस समय इंटरनेट न होने से कंपनियां किराए पर ऑफिस लेकर यह धोखाधड़ी करती थीं। अब बदलाव यह है कि ऐसी कंपनियां पब्लिक के फोन और मोबाइल नंबर का डाटा जुटाकर उन्हें लुभाने का खेल खेलती हैं। सरकार से लाइसेंस लेकर काम कर रहीं इन कंपनियों की कोई निगरानी नहीं होती। शुरूआत में विश्वास जमाने के लिए ये कंपनियां कुछ निवेशकों को पैसा भी वापस करती हैं लेकिन जैसे ही वह मोटी रकम जुटा लेती हैं, अचानक गायब हो जाती हैं। ऐसी धोखाधड़ी के मामले फिर से सामने आने लगे हैं।

पिछले साल पकड़ी गईं थीं कई फर्जी फाइनेंस कंपनियां
- करीब डेढ़ साल पहले बदायूं में कल्पतरु और कल्पवट नाम की दो फर्जी फाइनेंस कंपनियां पकड़ी गईं थीं। इन दोनों कंपनियों ने कई शहरों में निवेश के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये इकट्ठा किए और बाद में नकदी लेकर फरार हो गईं। इन कंपनियों ने सबसे ज्यादा झांसा बदायूं के निवेशकों को दिया था। रिपोर्ट हुई लेकिन किसी की रकम वापस नहीं हुई। बरेली में भी डेढ़ साल पहले गंगा इंफ्रा सिटी नाम की एक फाइनेंस कंपनी लोगों का पैसा लेकर अचानक गायब हो गई। ऊंची ब्याज दर का लालच देकर इस कंपनी ने निवेशकों से खूब रकम एकत्र की। इसकी एफआईआर दर्ज हुई लेकिन निवेशकों को आज तक पैसा वापस नहीं हो सका है।
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