बरेली। राज्य भंडारण निगम (एसडब्ल्यूसी) में अनाज के ट्रांसपोर्टेशन के ठेके को लेकर लंबे समय से बड़ा खेल चल रहा था। ई टेंडर के बजाय करोड़ों रुपये का काम मैन्युअल टेंडर से कराया जा रहा ताकि चहेतों को फायदा पहुंचाकर अपनी जेबें भरी जा सकें। यही नहीं नये टेंडर जान बूझकर लटकाए जाते हैं, जिससे टेंडर अवधि खत्म होने के बाद पुराने ठेकेदारों से कुटेशन पर काम कराया जा सके। करोड़ों की कमाई के लिए अफसर प्रचलित बाजार दरों से 300-400 प्रतिशत अधिक की दर से इन ठेेकेदारों को काम देकर सरकारी धन का बंदरबांट करते हैं।
बरेली मंडल में एसडब्ल्यूसी में टेंडर का खेल काफी दिन से चल रहा है। इसके चलते ही मुरादाबाद और बरेली मंडल देखने वाले एसएन यादव को यहां से हटाकर लखनऊ स्थित मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। उनके स्थान पर रविंद्र कुमार तैनात किए गए हैं। यादव ने दावा किया वे सामान्य प्रक्रिया में हटाए गए हैं, जबकि प्रबंध निदेशक रविकांत गोस्वामी ने बताया कि टेंडर और अन्य मामलों में संदिग्ध अधिकारियों पर कार्रवाई हो रही है। इसलिए यादव को बरेली से हटाकर मुख्यालय बुलाया गया है, उनके खिलाफ विभागीय जांच की प्रक्रिया भी चल रही है।
तीन महीने से लटका है टेंडर प्रकरण
चहेतों और पुराने ठेकेदारों को मनमानी दरों पर परिवहन ठेका देने के लिए विभागीय अफसर ई-टेंडर प्रणाली के तहत मांगे टेंडर पर कुंडली मारकर बैठ गए हैं। नियमानुसार टेंडर प्रक्रिया 90 दिन यानी तीन माह में पूरी कराना जरूरी है। तीन माह पहले एसडब्ल्यूसी ने बरेली मंडल के पांच गोदामों से रेलवे माल गोदाम तक खाद्यान्न पहुुंचाने के लिए ई-टेंडर मांगे थे। बताया जाता है कि विभाग ने पहली बार ई-टेंडर प्रणाली अपनाई तो पहले से काफी कम दरों पर प्रस्ताव आ गए। इसकी भनक लगते ही विभाग ने टेंडर प्रक्रिया लंबित कर दी, तीन माह पूरे होने के बाद तकनीकी तौर पर यह प्रक्रिया दोषपूर्ण हो जाएगी। ऐसे में एसडब्ल्यूसी के अफसर अपने पुराने चहेते ठेकेदारों से पुरानी दरों पर ही काम कराते रहेंगे।
एमडी भी हो चुके हैं सस्पेंड
टेंडर घोटाले में कुछ महीने पहले ही शासन ने सख्ती शुरू कर दी थी। आरएम एसएन यादव को हटाने से कुछ महीने पहले तत्कालीन प्रबंध निदेशक एसडब्ल्यूसी एसपी सिंह निलंबित किए जा चुके हैं। कुछ अन्य मंडल के आरएम भी सस्पेंड हो चुके हैं। इसके बावजूद अधिकारी रुपये की बंदरबांट के लिए पूरी तरह से मनमानी करने में लगे थे।
फैक्ट फाइल
गोदाम क्षमता/ हजार टन
रसुइया (बरेली) 86
वजीरगंज 10
दातागंज 20
ललौरीखेड़ा 90
शाहजहांपुर 105
ई-टेंडर प्रक्रिया तीन माह में पूरी होना चाहिए। बरेली मंडल में परिवहन निविदा प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। इसमें एनआईसी नेटवर्क आड़े आ रहा है। टेंडर प्रक्रिया पूरी तौर से पारदर्शी होगी और मनमानी दरों पर ठेके नहीं देंगे। आवश्यक कागजात भी मांगे गए हैं।
- रविकांत गोस्वामी, एमडी, एसडब्लूसी