उन्होंने बताया कि वह शहजिल इस्लाम के बयान की वीडियो सीडी विवेचक को दे चुके थे और अपने बयान दर्ज करा चुके थे। फिर भी उन्हें अंधेरे में रखकर मामला निपटा दिया गया। अब उनकी जान को खतरा पैदा हो सकता है। मामले की निष्पक्ष विवेचना की जरूरत है। एसएसपी ने उन्हें आश्वासन दिया कि मामले में सभी विकल्पों पर विचार किया जाएगा।
विवेचना मिलते ही निपटाई, फिर चार्जशीट कोर्ट पहुंचाई
एसएसपी को पता लगा है कि चर्चित मामले में विवेचक इंस्पेक्टर भरत वर्मा ने विवेचना हाथ में आने के कुछ दिन बाद ही एफआर लगा दी थी। तत्कालीन एसएसपी रोहित सिंह सजवाण के वक्त में यह एफआर लगाई गई। फिर इसे कोर्ट पहुंचाने के लिए कुछ दिन इंतजार किया गया। एसएसपी अखिलेश चौरसिया के आने पर इस एफआर को भरत वर्मा ने कोर्ट में दाखिल कर दिया। इस तरह मौजूदा एसएसपी प्रभाकर चौधरी के आने तक मामला निपट चुका था।
एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने बताया कि यह मेरे कार्यकाल से पहले का मामला है। एफआर कोर्ट में काफी पहले जा चुकी है। इस मामले में कार्रवाई आगे बढ़ाने को लेकर क्या विकल्प हो सकते हैं, इस बारे में एसपी क्राइम को निर्देश दिए हैं। विधिक राय ली जा रही है। जल्दबाजी में एफआर लगाने में विवेचक के अलावा जो भी दोषी मिलेंगे, उनके खिलाफ भी कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।