पीलीभीत लोकसभा क्षेत्र के पांच भाजपा विधायकों में से चार ने मेनका गांधी के खिलाफ बगावत कर दी। रविवार को एक बरातघर में संयुक्त प्रेसवार्ता में सभी ने कहा कि मेनका ने क्षेत्र में विकास के नाम पर कुछ भी नहीं किया। पीलीभीत की जनता को अब स्थानीय प्रत्याशी चाहिए। विधायकों ने कहा कि उन्होंने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को इस संबंध में पत्र भेजा है।
वर्ष 1989 से अब तक छह बार सांसद रहीं मेनका गांधी के विरोध में अब उनकी ही पार्टी के नेता सामने आए हैं। प्रेसवार्ता में बीसलपुर विधायक रामसरन वर्मा ने कहा कि वह लगभग 30 साल से जिले की उपेक्षा कर रही हैं। जिले के सर्वे में लोग अब स्थानीय उम्मीदवार को तरजीह दे रहे हैं। बरखेड़ा विधायक किशन लाल राजपूत ने कहा कि लोकसभा के लिए स्थानीय प्रत्याशी की मांग जनभावनाओं से प्रेरित है। सांसद दिल्ली में रहती हैं इसलिए आम आदमी अपने सांसद से दूर रहता है।
बहेड़ी विधायक छत्रपाल गंगवार और पीलीभीत सदर से विधायक संजय गंगवार ने भी खुलकर विरोध किया। भाजपा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष सुरेश गंगवार ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र लिखकर स्थानीय उम्मीदवार की मांग की गई है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व मंत्री डॉ. विनोद तिवारी भी शामिल रहे। विधायकों ने यह भी कहा कि यदि वरुण गांधी को टिकट मिला तो उनका भी विरोध होगा। पूरनपुर विधायक बाबूराम पासवान प्रेसवार्ता में शामिल नहीं रहे।
यह अनुशासनहीनता: भाजपा जिलाध्यक्ष
जिला भाजपा अध्यक्ष राकेश गुप्ता ने कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक पार्टी है। यहां सभी को अपनी बात कहने का हक है, लेकिन पार्टी फोरम पर। इस तरह प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बात कहना पार्टी की मर्यादा के खिलाफ तो ही है, यह अनुशासनहीनता भी है। जहां तक इन लोगों द्वारा राष्ट्रीय अध्यक्ष को भेजे गए पत्र का सवाल है तो उस पर जिला महामंत्री गुरभाग सिंह, संजीव प्रताप सिंह के हस्ताक्षर फर्जी किए गए हैं। दोनों प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद नहीं थे। उन्होंने पत्र पर अपने हस्ताक्षर होने से भी मना किया है। प्रेस कांफ्रेंस में बसपा के कुछ लोग मौजूद थे। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसकी रिपोर्ट पार्टी हाईकमान को भेजी जाएगी।
पीलीभीत मेरी कर्मभूमि, बाहरी कैसे: मेनका
सांसद मेनका गांधी का कहना है कि सिर्फ वे लोग इस तरह की बातें कर रहे हैं जो बसपा छोड़कर पार्टी में आए हैं। जहां तक विधायकों का सवाल है तो अभी दो दिन पहले ही इनमें से एक विधायक उनसे दिल्ली में मिलकर गए हैं। उन्होंने कहा, पीलीभीत मेरी कर्मभूमि है। मेरा पीलीभीत की जनता से क्या रिश्ता है, यह इन लोगों को बताने की जरूरत नहीं है। मेरी जवाबदेही भी जनता के प्रति है। बसपा के लोगों के साथ बैठकर पार्टी के कुछ लोग इस तरह की बातें करके आखिर क्या संदेश देना चाहते हैं, यह समझ से परे है।