साइबर ठगों और हवाला कारोबारियों को उपलब्ध कराते थे खाते
तलाशी में संदिग्धों के पास से कई बैंक पासबुक, बैंक में रुपये जमा करने की रसीदें, एक ही नंबर के जाली आधार कार्ड मिले। सख्ती से पूछताछ करने पर आरोपियों ने साइबर ठगों और हवाला कारोबारियों को बैंक खाते उपलब्ध कराने की बात स्वीकार की। यह भी बताया कि बैंक खाते उपलब्ध कराने के बदले उनको मोटा कमीशन मिलता था।
उन्होंने बताया कि चौधरी तालाब निवासी हामिद, प्रेमनगर थाना क्षेत्र के बानखाना निवासी मोहित और बदायूं निवासी जीशान भी उनके गिरोह में शामिल है। एसपी सिटी ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। अब तक देश के कई राज्यों से करोड़ों की ठगी सामने आ चुकी है।
तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा, आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों से जुड़े तार
जांच में सामने आया है कि साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले गिरोह के तार देश के कई राज्यों से जुड़े हुए हैं। इन राज्यों में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज कराई गई शिकायतों की जांच की कई तो बैंक खाते और मोबाइल नंबर बरेली के निकले। इसके बाद से ही साइबर क्राइम सेल गिरोह का भंडाफोड़ करने में जुटी हुई थी। अधिकारियों का कहना है कि वांछित आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद कुछ और खुलासे हो सकते हैं।
लालच देकर ठेला-खोमचा वालों और गरीबों के खुलवाते थे बैंक खाते
गिरोह के सरगना मुशर्रफ ने पूछताछ में बताया कि वह उत्तराखंड की एक फैक्टरी में काम करता था। वहां उसकी मुलाकात कुछ लोगों से हुई। उन्होंने कहा कि अगर कुछ बैंक खाते उपलब्ध कराओ तो कमीशन के रूप में मोटा मुनाफा हो सकता है। इसके बाद बरेली आकर उसने गिरोह तैयार किया।
अब्दुल, निशांत, शिवम, हामिद, मोहित जीशान के जरिये वह ठेला-खोमचा वालों को लालच देकर बैंक में उनके खाते खुलवाते थे। पूरी डिटेल, एटीएम, यूपीआई आदि अपने पास रखते थे। साइबर ठगी और हवाला के जरिये इन खातों में जो रुपये आते थे वह रुपये निकालने के बाद दूसरे खातों में जमा कर दिया करते थे। इसके बदले उनको कमीशन मिलता था। अगर किसी मामले का खुलासा होता था तो वह साफ बच जाते थे, क्योंकि बैंक खाते से उनका कोई सरोकार नहीं होता था।