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चालीस मिनट का गेम, बीस मिनट में निपटाया...रिजल्ट सब हारे

Fri, 01 Dec 2017 01:40 AM IST
बरेली।
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विश्वविद्यालय की अंतर महाविद्यालयीय प्रतियोगिताओं में होने वाली खानापूरी अब खिलाड़ियों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। चालीस मिनट के खेल को बीस मिनट में कराने का नतीजा तो जल्दी निकलता है पर यह खिलाड़ियों को फिसड्डी बनाता जा रहा है। बीते दिनों वर्धमान कॉलेज बिजनौर में हुई पुरुष वर्ग की अंतर महाविद्यालयीय बास्केटबाल प्रतियोगिता में चुनी गई विश्वविद्यालय की टीम के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। प्रतियोगिता से चुनी गई बीस खिलाड़ियों की टीम फिजिकल के मानकों पर औंधे मुंह गिर गई। एक दिसंबर से जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी दिल्ली में हो रही पुरुष वर्ग की अंतर विश्वविद्यालयीय प्रतियोगिता के लिए चुने गए बीस खिलाड़ियों में सिर्फ एक ही पचास फीसदी खेलने लायक मिला। एक अन्य चालीस फीसदी और बाकी 18 खिलाड़ी 35 फीसदी से ऊपर नहीं पहुंच पाए। पिछली कुछ अन्य टीमों की तरह बास्केटबॉल की टीम भी फिजिकल के मानकों पर फेल हो गई और विश्वविद्यालय की पूरी टीम ही रद्द कर दी गई।
मानकों के अनुसार प्रतियोगिताएं न कराने से पैदा हो रहे ऐसे हालात
स्पोर्ट्स स्टेडियम के बास्केटबॉल कोच के अनुसार मौजूदा वक्त में बास्केटबॉल मुकाबला दस-दस मिनट के चार क्वार्टर में होता है। पहले क्वार्टर के बाद दो मिनट का ब्रेक, दूसरे क्वार्टर के बाद दस मिनट और तीसरे क्वार्टर के बाद फिर दो मिनट का ब्रेक मिलता है। कुल 54 मिनट का मुकाबला होता है पर मैच कराने में सवा घंटा तक लग जाता है। अब अंतर महाविद्यालयीय प्रतियोगिताओं का सच जानें। मुकाबले में आठ से दस टीमें होती हैं और एक ही दिन में प्रतियोगिता निपटाने के चक्कर में चालीस मिनट की जगह बीस मिनट में एक मैच निपटा दिया जाता है। यानी पांच मिनट के चार क्वार्टर। जब खिलाड़ी मानकों के अनुसार खेला ही नहीं तो वह प्रदर्शन क्या करेगा। विश्वविद्यालय कई बार आयोजकों और चयन समिति को इस बाबत बता दी चुका है पर कोई नतीजा नहीं निकल पाता।
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वर्जन
अनफिट खिलाड़ियों को किसी भी हाल में नेशनल के लिए नहीं भेजेंगे। अच्छे खिलाड़ी आए तो उनकी अच्छी तैयारी कराएंगे। खेल की फीस लेने वाले कॉलेज भी तो अपने स्तर से कुछ कराएं। बास्केटबॉल में एक लड़का ही मानकों पर खरा उतरा। जो टीम मैदान पर लगातार एक घंटा दौड़ नहीं सकती वो मैच क्या खेलेगी, इसलिए टीम रद्द कर दी गई है।
- प्रो. एके जेटली, क्रीड़ा सचिव, रुविवि
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