40 साल पुराने पुल में कई जगह हुए छेद, सरियों के जाल से छूटकर गिरने लगा सीमेंट
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सड़क दुरुस्त करने को पुरानी परत हटाए बगैर नई परत चढ़ाने से हजारों टन बढ़ गया वजन
बरेली। पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों की लापरवाही ने किला पुल को भी बेहद खतरनाक बना दिया है और अब इसके कभी भी ढह जाने की आशंका जताई जा रही है। पुल की सड़क पर आरपार इतने बड़े छेद हो गए हैं कि उनसे नीचे सड़क तक साफ दिखने लगी है। भारी वाहनों की धमक से पुल के लिंटर के सरियों के जाल से सीमेंट छूटकर गिरने लगा है। कई सरिया ऊपर निकलकर दोपहिया वाहनों से गुजरने वालों के लिए बड़ा खतरा बनी हुई हैं।
किला पुल 40 साल पहले बना था और शायद अभी कई और साल चल सकता था लेकिन इंजीनियरों के भ्रष्टाचार की वजह से समय से पहले ही खतरनाक हो गया है और अब इस पर गुजरना तक सुरक्षित नहीं रह गया है। पुल में कई जगह दरारें पड़ गई हैं। सड़क में आरपार छेद हो गए हैं जिनसे नीचे की सड़क दिखने लगी है। पुल पर भारी वाहन या फिर नीचे ट्रेन गुजरने पर पुल बुरी तरह थरथराने लगा है। धमक से पुल के छज्जों से सीमेंट छूटकर गिरने लगता है। बेहद खतरनाक होने के बावजूद अधिकारियों को न इसे असुरक्षित घोषित करने का ख्याल आया है न ही इसकी मरम्मत कराई जा रही है। आसपास के लोगों को जरूर आशंका है कि कभी भी इस पुल पर बड़ा हादसा हो सकता है।
दरअसल पुलों पर दोबारा सड़क बनाने के लिए उस पर डामर की पुरानी परत को हटाया जाता है ताकि उनका वजन न बढ़े लेकिन किला पुल पर जब भी सड़क का रिन्युवल हुआ, पुरानी परत हटाए बगैर ही लगातार नई कोलतार की मोटी परत चढ़ा दी गई। इंजीनियरों ने तो यह खेल करके अपनी जेबें गरम कर लीं लेकिन इससे पुल का वजन उसकी क्षमता से हजारों टन ज्यादा बढ़ गया। इससे न सिर्फ पुल समय से पहले जर्जर हो गया बल्कि 24 घंटे भारी यातायात गुजरने से उसकी दशा और खराब हो गई। अब पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर भी मानते हैं कि यहां बड़ा हादसा हो सकता है। करीब एक साल पहले पीडब्लूडी की ओर से करीब एक करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है लेकिन उसे अब तक मंजूरी नहीं मिली है। चीफ इंजीनियर देवेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि वह किला पुल का मुयाअना कर इसकी रिपोर्ट शासन को भेजेंगे। जल्द ही पुल की मरम्मत कराई जाएगी।