75 फीसदी उपस्थिति के सख्त नियम ने बढ़ाई बरेली कॉलेज के विद्यार्थियों की मुश्किल
बरेली। उच्च शिक्षा संस्थानों में शैक्षणिक अनुशासन स्थापित करने की दिशा में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल का कड़ा रुख अब बरेली कॉलेज के विद्यार्थियों पर भारी पड़ रहा है। राज्यपाल की ओर से विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में 75 फीसदी से कम उपस्थिति वाले विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल न करने के स्पष्ट निर्देशों के बाद अब उन छात्र-छात्राओं के सामने सामने परेशानी खड़ी हो गई है, जो कक्षा से गैरहाजिर रहे। यह नया नियम सीधे तौर पर छात्रवृत्ति आवेदन प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है, जिससे बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के सिर पर आर्थिक संकट मंडरा रहा है।
बरेली कॉलेज में लंबे समय से विद्यार्थियों की उपस्थिति एक बड़ी चुनौती रही है। कॉलेज प्रशासन ने नियमितता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किया। विद्यार्थियों को चेतावनी नोटिस जारी किए गए, यहां तक कि उनके अभिभावकों को भी बच्चों की कम उपस्थिति के बारे में जानकारी दी गई। इन तमाम कवायदों के बावजूद विद्यार्थियों में कोई सुधार नहीं आया।
अब यह लापरवाही छात्र-छात्राओं के भविष्य और आर्थिक सहायता पर ग्रहण लगा रही है। सामान्य और ओबीसी वर्ग के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर है। इस आवेदन प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा है एक शपथ पत्र, जिस पर विषय शिक्षक और विभागाध्यक्ष की ओर से 75 फीसदी उपस्थिति का सत्यापन करना आवश्यक है।
जैसे ही छात्र- छात्राएं अपने फॉर्म जमा करने के लिए कॉलेज कार्यालय पहुंच रहे हैं, उनकी कक्षा में अनुपस्थिति सामने आ रही है। अधिकांश विद्यार्थी इस अनिवार्य 75 फीसदी उपस्थिति के मानक को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। नतीजतन, कॉलेज कार्यालय से उन्हें निराशा के साथ वापस लौटना पड़ रहा है।
कॉलेज के अधिकारियों का कहना है कि वह राज्यपाल के निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य हैं और 75 फीसदी उपस्थिति सुनिश्चित किए बिना वह किसी भी विद्यार्थी के फॉर्म को अग्रसारित नहीं कर सकते। प्राचार्य प्रो. ओपी राय ने बताया कि विद्यार्थियों को रोजाना कॉलेज आने के लिए सूचित किया जा रहा है, इसके बाद भी कई छात्र-छात्राएं इसके गंभीरता से नहीं ले रहे है। संवाद