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बैंड में करंट उतरने से मौत: डेढ़ सौ रुपये की खातिर जान गंवा बैठे दो किशोर; बेटे का शव देख गश खाकर गिरी मां

Fri, 23 Jun 2023 12:46 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

जिन बाल श्रमिकों की जान गई, वे महज डेढ़ सौ रुपये मजदूरी की खातिर बैंड मालिक के साथ आए थे। उनकी मौत से परिवारों में कोहराम मच गया। सचिन की मां बेटे का शव देखकर बेसुध हो गई। 
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मृतक सचिन के रोते बिलखते परिजन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली के हाफिजगंज क्षेत्र के धमीपुर गांव में बृहस्पतिवार रात बरात चढ़त के दौरान बैंड का ऊपरी हिस्सा हाईटेंशन विद्युत लाइन से टकरा गया। इससे लाइट उठाकर ले जा रहे दो किशोरों की करंट लगने से मौत हो गई। जिन बाल श्रमिकों की जान गई, वे महज डेढ़ सौ रुपये मजदूरी की खातिर बैंड मालिक के साथ आए थे। घटना के बाद मौके पर भगदड़ मची तो बैंड मालिक भी खिसक गया।

बैंड मालिक समेत तीन के खिलाफ दी तहरीर 

घटना को लेकर लोगों में गुस्सा है। उन्होंने बैंड मालिक समेत तीन लोगों के खिलाफ हाफिजगंज थाने में रिपोर्ट लिखाने को तहरीर दी है। इसमें आरोप लगाया है कि बच्चों को बिना बताए डेढ़ सौ रुपये के हिसाब से लाइट उठाने को ले गए और हादसे के बाद फरार हो गए। बरात के बैंड की ठेली गांव में वहीं खड़ी है जहां वह तारों से टकराई थी।

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हाफिजगंज कस्बे से पांच किमी दूर पीलीभीत रोड पर स्थित गांव राजघाट के बगल में ही औरंगाबाद बड़ा गांव है। शहनाज बैंड के मालिक इकरार अहमद ने राजघाट में दुकान खोल रखी है, जहां से बुकिंग की जाती है। बैंड में काम करने वाले लड़के औरंगाबाद के ही हैं। एक बरात में 10-15 लड़के जाते हैं। इनमें से कुछ लाइट उठाते हैं तो कई जनरेटर खींचते हैं। बैंड की गाड़ी में बैठकर ही इन्हें वापस लौटना था। इनके खाने की जिम्मेदारी भी बैंड मालिक की थी।

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लड़के बेफिक्र होकर लाइटें उठाए चल रहे थे, तभी तारों में चिंगारी के साथ करंट एक से दूसरे को लगता चला गया। जो बैंड के ज्यादा पास थे, उन्हें जोर का झटका लगा और धड़ाम से वहीं गिर गए। इनमें सचिन पुत्र प्रेमशंकर,  सचिन पुत्र सतीश और बग्घी चालक नन्हेलाल शामिल थे। बाकी लोगों को उतना तेज करंट नहीं लगा, हालांकि वे भी चीखते हुए गिरे और हाथ-पैर पटकने लगे। कुछ लोगों ने समझदारी दिखाते हुए लकड़ी से तारों को हटाकर लड़कों को उठाया। एंबुलेंस से उनको अस्पताल भेजा गया। वहां दो किशोरों की मौत हो गई। बताया जाता है कि दो और लड़कों का पता नहीं चल रहा है।

सचिन की मां पीटती रही छाती

सूचना पर किशोरों के परिजन नवाबगंज सीएचसी पहुंच गए। यहां सचिन का शव मोर्चरी में रखा था। वहां उसकी मां सरोज गश खाकर बेहोश हो गईं। वह छाती पीटते हुए कह रही थीं कि उन्हें नहीं पता था कि बेटे को दोबारा जिंदा नहीं देख पाएंगी।

महीने में डेढ़ हजार रुपये तक कमा लेते थे लड़के

दूसरे सचिन के भाई दिनेश, अनिल और रवि भी नवाबगंज सीएचसी आ गए थे। दिनेश ने बताया कि पिता के पास कोई जमीन नहीं है। पूरा परिवार मजदूरी करके ही पेट पालता है। सचिन बैंड के साथ जाने लगा था। इनाम आदि मिलाकर वह एक बरात में डेढ़ से दो सौ रुपये तक कमा लेता था। सहालग के मुताबिक महीने में डेढ़ हजार रुपये तक कमा लेता था।
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पवन की हालत में सुधार

सीओ नवाबगंज चमन सिंह चावड़ा ने बताया कि पवन को बरेली रेफर करने जा रहे थे पर यहीं एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। उसकी हालत में कुछ सुधार है। अनिल और सनी बरेली भेजे गए हैं।

सन्नाटे के बीच हुई रस्में

दो मौतों के बाद समारोह में भी मातम पसर गया। बराती जनवासे की ओर चले गए। खास लोगों के साथ दूल्हा ही दुल्हन के घर तक पहुंचा। वहां बिना ढोलक की थाप या किसी संगीत के विवाह की रस्में हुईं। दुल्हन के पिता रामपाल ने बताया कि कि सुबह जल्दी ही विदाई कर दी जाएगी।
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