गौरवशाली है अतीत, हे धरा बड़ी उर्वर पावन... ये पंक्तियां हैं एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के लिए तैयार किए गए कुलगीत की, जिसे दीक्षांत समारोह में पहली बार गाया जाएगा। हाल ही में रचे गए विश्वविद्यालय के इस कुलगीत में रुहेलखंड परिक्षेत्र के इतिहास और संस्कृति का समावेश है। मंगलवार को होने वाली कार्य परिषद की बैठक में इसपर अंतिम मुहर लगेगी।
विश्वविद्यालय का कुलगीत तैयार कराने के लिए काफी समय से प्रयास चल रहा था। इस बार दीक्षांत समारोह से ऐन पहले विश्वविद्यालय प्रशासन ने कुलगीत तैयार कराने का फैसला लिया। सात आठ विशेषज्ञों से कुलगीत लिखवाए गए। आखिर में बरेली के प्रशांत अग्रवाल के लिखे गए कुलगीत को फाइनल किया गया। 4 मिनट 23 सेकेंड के इस कुलगीत की शुुरुआत रुहेलखंड परिक्षेत्र के गौरवशाली इतिहास को बयां करती है। इसके बाद में रुहेलखंड परिक्षेत्र के इतिहास और संस्कृति को भी शामिल किया गया है। आखिरी लाइनों में विश्वविद्यालय के स्लोगन चरैवेति चरैवेति को जोड़ा गया है जिसका अर्थ लगातार आगे बढ़ते रहना है। डॉ. संतोष कुमार अरोड़ा के नेतृत्व में यह कुलगीत दीक्षांत समारोह छात्राएं प्रस्तुत करेंगी। उनकी टीम बना ली गई है।
कुलगीत तैयार हो गया है। मंगलवार को कार्य परिषद में इसको रखा जाएगा। पास होने के बाद इसको दीक्षांत में गाया जाएगा। अगर कुछ संशोधन के प्रस्ताव आएंगे तो करा दिया जाएगा। विवि में पहली बार कुलगीत तैयार हुआ है यह गौरव की बात है।
-प्रोफेसर अनिल कुमार शुक्ला, कुलपति