बरेली। गंगाशील महाविद्यालय में मंगलवार को ''भारतीय वाङ्मय और विज्ञान वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता'' विषय पर हाइब्रिड मोड पर अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रो. हरिश्चंद मिश्र ने कहा कि वैज्ञानिक विकास के लिए बौद्धिक चिंतन को धरातल पर लाना होगा। सिद्धांत व विज्ञान को मिलाकर ही मनुष्य का विकास हो सकता है।
जो शब्द हमारी सामान्य जानकारी में रहते हैं, उन्हें अपना लेना चाहिए। इससे भाषा की शुद्धता का वैचारिक आदान-प्रदान होता है। वहीं, प्रबंध निदेशिका डॉ. शशिबाला राठी ने कहा कि वर्तमान में साहित्य के तीन रूपों को देखा जा रहा है। इस दौरान सचिव डॉ. एनके गुप्ता, कार्यकारिणी निदेशिका डॉ. शालिनी माहेश्वरी, निदेशक डॉ. दुरेश चंद, प्राचार्या डॉ. सीमा चतुर्वेदी मौजूद रहीं। संवाद