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Bareilly News: संवेदनशील ब्लॉकों के मलेरिया मरीजों की फॉलोअप जांच शुरू

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बरेली। रोकथाम के दावों के बीच मलेरिया के मरीजों की तादाद बढ़ती जा रही है। हालत ये है कि जिन संवेदनशील इलाकों में सघन निगरानी हो रही है, वहां भी मरीज मिल रहे हैं। लिहाजा, मलेरिया विभाग की ओर से अब पूर्व में मलेरिया पीड़ित रहे लोगों की फॉलोअप जांच शुरू कराई गई है।
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जिला मलेरिया अधिकारी सत्येंद्र कुमार के मुताबिक, फेल्सीपेरम मलेरिया का इलाज चार दिन और विवैक्स मलेरिया के इलाज का कोर्स 14 दिन का होता है। फेल्सीपेरम के मरीज कोर्स पूरा करते हैं लेकिन विवैक्स का इलाज 14 दिन का होने से कई मरीज बीच में ही दवा का सेवन बंद कर देते हैं। लिहाजा, मलेरिया के पैरासाइट्स पूरी तरह नष्ट नहीं होते, बल्कि निष्क्रिय अवस्था में शरीर में ही रहते हैं। जो मौका मिलने पर पनपकर फिर से मलेरिया का रोगी बना देते हैं।
बताया कि ऐसे मरीज में हल्के लक्षण होते हैं पर ये मलेरिया के वाहक होते हैं। अगर ऐसे मरीज का खून चूसकर वही मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काट ले तो उन्हें भी मलेरिया होने की आशंका रहती है। संभवत: इंडोर रेसिड्यूअल स्प्रे के बावजूद मलेरिया के मरीज मिल रहे हैं। इसलिए अब जो मरीज भी मलेरिया पीड़ित हैं, उनकी फॉलोअप जांच करा रहे हैं।
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संवेदनशील इलाकों में ही मिले 70 फीसदी मरीज
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जिले में अब तक करीब आठ सौ मरीज मलेरिया के मिले हैं। इसमें पांच सौ से ज्यादा यानी करीब 70 फीसदी मरीज पूर्व में संवेदनशील रहे ब्लॉक भमोरा, शेरगढ़, फतेहगंज पश्चिमी, मीरगंज में हैं। जबकि इन्हीं क्षेत्रों में आईआरएस भी हो रहा है। रिपोर्ट के आधार पर अब मलेरिया विभाग ने इन गांवों में सघन आईआरएस की कवायद शुरू की है। ब्यूरो
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