बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के अंदर 2009 में कई पशुओं की मौत का जिम्मेदार बना फूट एंड माउथ डिज़ीज़ (एफएमडी) वायरस यानी खुरपका-मुंहपका रोग फिर लौट आया है। संस्थान के गाय और भैंस फार्म में दो पशुओं में इस वायरस के मिलने की पुष्टि के बाद हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। संस्थान प्रशासन ने 35 वैज्ञानिकों की टीमों को 24 घंटे फार्म की निगरानी में लगा दिया है। कैंपस में दवाओं का छिड़काव करने के बाद फार्म के सभी सात सौ पशुओं का वैक्सीनेशन तेजी से किया जा रहा है। संस्थान की मुक्तेश्वर ब्रांच की लैब में जांच के लिए छह सैंपल और भेजे गए हैं। हालांकि वायरस की चपेट में आकर कई पशुओं के मरने की चर्चा है लेकिन इसकी अधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
संस्थान में पशुधन उत्पादन एवं प्रबंधन के कोआर्डिनेटर डॉ. त्रिवेणी दत्त ने बताया कि शुक्रवार को फार्म के कुछ पशुओं में एफएमडी के लक्षण देखे जाने के तत्काल बाद ही डायरेक्टर डॉ. आरके सिंह ने वैज्ञानिकों की टीमें बनाकर वायरस पर काबू पाने के इंतजाम शुरू करा दिए। फार्म तक आने वाले रास्ते पर चूने का फुटपाथ बना दिया। फार्म में किसी भी बाहरी व्यक्ति के आने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। फार्म में रहने वाले एक-एक पशु की दिन में 24 घंटे में तीन-तीन बार चेकअप कराया जा रहा है। बुखार से पीड़ित पशुओं को अलग से निगरानी में रखा गया है। डॉ. दत्त ने दावा किया कि अब तक के प्रयासों से इस वायरस को बढ़ने पर कंट्रोल कर लिया गया है। उन्होंने वायरस की चपेट में आकर कुछ पशुओं की मौत की सूचना को गलत बताया।
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पशु चिकित्सा विभाग भी अलर्ट
आईवीआरआई प्रशासन ने पशु चिकित्सा विभाग को भी अलर्ट कर दिया है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. एनपीएस गहलोत ने बताया कि आईवीआरआई से अलर्ट का पत्र मिलने के बाद जिले में पशु चिकित्सा विभाग की टीमेें बना दी गई हैं। सोमवार को उन्होंने दोहना, पट्टी, दीदारपुर और भोजीपुरा से सटे कुछ गांवों में भ्रमण करके पशुओं का सैंपल परीक्षण किया।
70 गांवों की खास निगरानी
आईवीआरआई के फार्म में ठेकेदारों के जरिए काम करने वाले 70 कर्मचारियों के जरिए एफएमडी वायरस उनके गांवों के पशुओं तक पहुंचने की आशंका जताई गई है। इसके चलते आईवीआरआई ने इन कर्मचारियों के गांवों की लिस्ट पशु चिकित्सा विभाग को उपलब्ध करा दी है और उनके गांवों में खास निगरानी रखने को कहा है। यह माना जा रहा है कि यह वायरस इन कर्मचारियों के कपड़ों के जरिए गांव तक पहुंच सकता है।
क्या है एफएमडी
एफएमडी को हवा के जरिए बहुत तेजी से फैलने वाला पशुजनित रोग माना जाता है। यह तेज बुखार के साथ पशुओं के पैरों और मुंह को प्रभावित करता है। इससे पशुओं के मुंह और पैर पक जाते हैं। मुंह में छाले होने से वह कुछ खा-पी नहीं सकते। कई मामलों में पशुओं के थनों में भी लाल चकत्ते पड़ जाते हैं। डॉ. दत्त बताते हैं कि एफएमडी वायरस जहां तक पहुंचता है, वहां से पांच किलोमीटर दायरे में हवा में घुलकर दूसरे पशुओं को भी अपने चपेट में ले सकता है।
आईवीआरआई में कैसे घुसा वायरस
जिले के अंदर कहीं भी किसी पशु के इससे प्रभावित होने की अब तक कोई सूचना नहीं है इसीलिए अहम सवाल यह है एफएमडी वायरस आईवीआरआई में ही कैसे घुसा। हालांकि इस बारे में संस्थान के वैज्ञानिक कुछ भी बताने से बच रहे हैं। कोआर्डिनेटर का तर्क है कि कम प्रतिरोधक क्षमता वाले पशुओं में यह रोग होने की आशंका रहती है। इसके अलावा चार महीने से कम उम्र और आठ महीने के गर्भधारण वाले पशुओं का वैक्सीनेशन नहीं किया जाता इसलिए उनके वायरस की चपेट में आने की आशंका बनी हुई है।
कोट
फार्म के अंदर वायरस पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया है। लगातार निगरानी बरती जा रही है। पशुपालकों को चिंतित होने की जरूरत नहीं है।
-डॉ. त्रिवेणी दत्त, कोआर्डिनेटर पशुधन उत्पादन एवं प्रबंधन, आईवीआरआई