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Bareilly News: बाढ़ ने तोड़ी पशुपालकों की कमर, देसी घी में महंगाई का तड़का

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बरेली। केंद्र सरकार ने देसी घी पर जीएसटी की दर 12 से घटाकर 5 फीसदी कर दी, पर लोगों को राहत नहीं मिली। इसकी कीमत लगातार बढ़ती जा रही है। अगस्त में आई बाढ़ को इसकी वजह माना जा रहा है। घी महंगा होने का सीधा असर इससे बनने वाले उत्पादों की कीमत भी बढ़ जाएगी। ग्राहकों की जेब पर भी इसका असर पड़ेगा।
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कारोबारी गुलशन गुप्ता बताते हैं कि दिवाली से पहले जो घी 12 फीसदी जीएसटी के साथ 8200 रुपये प्रति टिन बिक रहा था, अब जीएसटी घटने के बावजूद वह 9300 रुपये की दर से बिक रहा है। शहर में रोज 1000 टिन देसी घी की खपत होती है। एक टिन में 15 किलो घी आता है। त्योहारी व सहालग के सीजन में ये मांग बढ़ जाती है। देसी घी का ज्यादातर इस्तेमाल मिठाई, नमकीन, मैदा व बेसन के बने स्नैक्स में होता है। आने वाले दिनों में इनकी कीमतें भी बढ़ सकती हैं।
कारोबारियों केके चंदानी ने बताया कि अधिकतर घी गुजरात, पंजाब, हरियाणा से आता है। स्टॉकिस्ट व कंपनी के लोगों ने बताया कि पंजाब, हरियाणा में अगस्त व सितंबर में जगह-जगह बाढ़ जैसे हालत बने। सबसे ज्यादा खराब स्थिति पंजाब की रही। मवेशी तक बाढ़ में बह गए। पशुपालकों को लाखों रुपये की हानि हुई। इस वजह से कंपनियों तक दूध नहीं पहुंच पाया। उपलब्ध स्टाॅक समाप्त होता रहा और दूध न मिलने से उत्पादन कम होता गया। इस वजह से कीमतें बढ़ती जा रही हैं। संवाद
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ब्रांड कीमत सितंबर में कीमत नवंबर में
प्रकाश 8200 9300
श्याम जी 7900 8550
श्यामा 8000 9100
मधुसूदन 9860 10600
राधिका 7900 8550
नोट : सभी रेट रुपये में 15 किलो के पीपे के हैं।
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