सुर्ख लाल और सफेद के बीच कई रंग हैं, नीले पीले और हरियाली के भी कई शेड हैं। कम्प्यूटर में ढूंढने की जरूरत नहीं कुदरत को निहार लीजिए। अमर उजाला परिसर में लगी पुष्प प्रदर्शनी में मुस्कराती कलियां और हंसते फूल मानो समझा रहे हों कि थोड़ा सा जीवन है इसे हंस के निभा लो और शायद यह भी कि इस जीवन में बहुत से रंग हैं जितने भर सको अपने कैनवास में भर लो।
पूरा परिसर नायाब फूलों की बगिया सा बन गया है । सुबह से शाम तक पुष्प प्रेमियों के आने का सिलसिला लगा रहा। बच्चे, जवान, बुजुर्ग हर आयु वर्ग के लोग फूलों की सोहबत में कुछ वक्त गुजारने आए । बच्चों की टोलियों ने फूलों की कतारों में टहलकर खूब धमाल किया। अमर उजाला के निर्णायक मंडल ने फूलों की वैरायटी, हेल्थ, प्रजेंटेशन के आधार पर विजेताओं का भी चुनाव कर लिया है। किचन गार्डन के चयन के लिए निर्णायक मंडल ने प्रतिभागियों के घर और संस्थाओं का दौरा किया।
प्रदर्शनी का उद्घाटन लघु उद्योग राज्यमंत्री भगवत सरन गंगवार ने किया। प्रदर्शनी का अवलोकन कर इस शानदार प्रयास को सराहा। सीजनल फ्लावर, कट फ्लावर, गार्डन और असाधारण वैरायटी (कैक्टस, बोन्जाई) समेत चार वर्गों में आयोजित प्रदर्शनी में इस बार कई दुर्लभ प्रजाति के पौधे भी देखने को मिल रहे हैं। इन्होंने एकबारगी निर्णायकों को भी हैरान कर दिया। वहीं इस बार पॉटेड प्लांट्स, कट फ्लावर, रीथ और बुके वर्ग में स्टाक, सालविया, कैंडीटफ, रेनकुलस, पेंजी, मैमुलिस, ऑसमोस, इकोबेरिया, कोलियस, डहेलिया, क्लान्चू आदि वैरायटी के पौधे सबका ध्यान खींच रहे हैं। प्रदर्शनी में दुर्लभ फूल आइरिश, एंथूरियम, क्लांथस और फ्यूस्चिया की प्रविष्टि सबसे खास रही। ठंडे इलाकों के इन पौधों ने सभी को आकर्षित किया। निर्णायक मंडल में आईवीआरआई के कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य तकनीकी अधिकारी डॉ. रंजीत सिंह, बरेली कालेज बॉटनी डिपार्टमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आलोक खरे और प्रवक्ता डॉ. राजेश कुमार, सोबती पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल अल्पना जोशी शामिल रहे। प्रतियोगिता के हर वर्ग में विजेताओं को पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र दिए जाएंगे। पुरस्कारों के संबंध में अमर उजाला के निर्णायक मंडल का निर्णय अंतिम एवं मान्य होगा।
फूलों के बीच रम गए मंत्री जी
पुष्प प्रदर्शनी में आए मुख्य अतिथि राज्यमंत्री भगवत सरन गंगवार फूलों के बीच रम से गए। उन्होंने अपने आईपैड से फूलों के बीच कई तस्वीरें लीं। उन्होंने फूलों के संयोजन के साथ ही इन्हें संजोने वालों की भी सराहना की। नन्हे पेड़ पर बड़े चकोतरे देखकर वे चकित रह गए।
किसी को फूल पसंद आए किसी को बोन्जाई
कैंट से मेजर वीके अवस्थी और मेजर सीमा त्रिपाठी यहां पहुंचे। उनके कैक्टस भी शो में शामिल हैं। बीबीएल स्कूल के वाइस प्रिंसिपल सर्वेश शर्मा अपने परिवार के साथ आए। साहू रामस्वरूप की प्रिंसिपल डॉ. शशि राठी, गंगाशील ग्रुप के डॉ. एनके गुप्ता, इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता रजनीश कुमार, लोटस इंस्टीट्यूट के चेयरमैन अभिषेक अग्रवाल और उनकी पत्नी अर्चना अग्रवाल, हकीम रामजीमल फर्म के देवेश कुमार और बरेली कालेज के सांख्यिकी विभाग की हेड डॉ. शुभ्रा कटारा समेत कई हस्तियां यहां पहुंचीं। इनके अलावा कई आम नागरिकों ने भी परिवार के साथ प्रदर्शनी का आनंद लिया। मढ़ीनाथ से परिवार के साथ आईं वृद्धा कीर्ति सिंह ने बताया कि यहां फूलों के साथ फलों के बोन्जाई देखकर अच्छा लगा। दुर्गानगर में नेट कैफे चलाने वाले राहुल अपनी बहन तान्या के साथ करीब दो घंटे फूलों के बीच रहे। राहुल ने कहा कि उन्होंने अपनी बालकनी में भी वाटिका बना रखी है। यहां कई ऐसी वैरायटी दिखीं जो उन्हें कई जगह खोजने पर भी नहीं मिल सकीं।
पारखी बोले
इतने हेल्दी और मेंटेन पौधे कई दिन बाद देखने को मिले। खासकर गुलाब की वैरायटी स्पेशल थीं। पाकड़, बरगद और अंगूर की बोन्जाई शानदार थीं। प्रदर्शनी हर साल इंप्रूव कर रही है। इस बहाने उन मालियों का भी सम्मान हो रहा है जो साल भर पसीना बहाते हैं। - डा. आलोक खरे
इस बार पिछले सालों से बेहतर प्रजाति के पौधे प्रदर्शनी में आए। फूल प्रकृति की नायाब धरोहर हैं। प्रकृति ने इन्हें इतने रंग दिए हैं जो किसी कंप्यूटर में भी नहीं हैं। - डॉ. रंजीत सिंह
प्रदर्शनी में चिली की वैरायटी सबसे खास लगी। कैक्टस की आठ वैरायटी बिल्कुल अलग किस्म की थीं। फूलों में मालियों की मेहनत का रंग साफ दिख रहा है। - डॉ. अल्पना जोशी
क्लाक फेयर ने मुझे सबसे ज्यादा अपनी ओर खींचा। यह रेयरेस्ट प्रजाति के हैं। बोन्जाई की प्रजातियां भी लोगों को लुभा रही हैं। - डॉ. राजेश कुमार
पुरस्कार वितरण आज
प्रबंधक अरुण सिंह ने बताया कि विजेता प्रतिभागियों को रविवार शाम पांच बजे अमर उजाला कार्यालय में पुरस्कृत किया जाएगा। उन्होंने आग्रह किया कि सभी प्रतिभागी शाम साढ़े चार बजे तक कार्यालय परिसर में अवश्य पहुंच जाएं।