शहर में हर तरफ आला हजरत उर्स के चर्चे हैं। उर्स स्थल इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान रूहानी फिजा से सराबोर हो चुका है। उर्स के मंच और मैदान पर तरह-तरह की दुकानें रौनक बिखेर रही है। बिजली की तेज रोशनी से नहाए इस मैदान के मुख्य द्वार पर शाम ढले परचम-ए-रजा लहर उठा। इसी के साथ तीन रोजा उर्स-ए-रजवी का आगाज किया गया।
उर्स स्थल पर शाम को जुटे देश-विदेश के हजारों जायरीन के बीच दरगाह प्रमुख अश्शाह मौलाना सुब्हान रजा खां (सुब्हानी मियां) ने परचम कुशाई की रस्म अदा की। गेट पर लगाए गए परचम-ए-रजा की जैसे ही सुब्हानी मियां ने डोर खींची फूल की पंखुड़ियां हवा में बिखर कर जायरीन पर बरसने लगीं और परचम फिजां में लहराने लगा। इसी के साथ पूरा मैदान आला हजरत जिंदाबाद, उर्स-ए-रजवी जिंदाबाद और परचम-ए-रजा जिंदाबाद के नारों से गूंज उठा।
इससे पहले ठिरिया निजावत खां, स्वालेहनगर और आजमनगर से परचमी जुलूस सैकड़ों की तादाद में चादरें लेकर सज्जादानशीन मौलाना अहसन रजा खां कादरी के कयादत में दरगाह आला हजरत पहुंचे। यहां चादरें पेश करने के बाद मुख्य परचम लेकर जुलूस उर्स स्थल के लिए रवाना हुआ। यहां से परचम अहसन मियां और सैयद आसिफ मियां ने अल्लामा सुब्हानी मियां को सौंपा, फिर उन्हीं की कयादत में संयुक्त जुलूस उर्स स्थल पहुंचा।
यहां परचम कुशाई की रस्म के बाद मुफ्ती मोहम्मद आकिल ने दुआ की। इस दौरान मुफ्त सलीम नूरी, मुफ्ती अफरोज आलम, मुफ्ती सैयद कफील अहमद, मौलाना डॉ. एजाज अंजुम, कारी अब्दुर्रहमान आदि ने उर्स-ए-रजवी की अहमियत पर रोशनी डाली। उर्स की व्यवस्था सैयद आसिफ मियां, राशिद मामू, शाहिद खां नूरी, अजमल नूरी, परवेज खां नूरी, औरंगजेब नूरी, ताहिर अल्वी, मुफ्ती रिजवान नूरी आदि ने संभाली।