मित्र वन, गोपाल उपवन... अब नगर वन की कवायद
इस वर्ष एक पौधा मां के नाम अभियान में बरेली प्रदेश में दूसरे स्थान पर रहा। जिले में मित्र वन, ऑक्सीजन वन, शौर्य वन, गोपाल वन, अटल वन आदि को विकसित करने की कवायद भी की गई। अब सीबीगंज में नगर वन विकसित करने का प्रस्ताव है। यहां वन विभाग का 30 हेक्टेयर क्षेत्र आरबोरेटम है। इसमें चंदन, रुद्राक्ष, केवड़ा समेत श्रीलंका में पाई जाने वाली दुर्लभ प्रजातियों के पेड़ मौजूद हैं।
बांस से जिले की पहचान लेकिन रकबा लगभग शून्य
बरेली की पहचान बांस बरेली के नाम से होती है। ब्रिटिशकाल के बाद भी बरेली में बांस की कई प्रजातियां पाई जाती थीं। यहां बांस के फर्नीचर का भी बड़ा काम था, लेकिन अब बरेली में बांस का रकबा लगभग शून्य हो गया है। सीबीगंज में वन विभाग के आरबोरेटम और आंवला क्षेत्र के अलावा अन्य स्थानों पर बांस की खेती ही नहीं होती। आरबोरेटम में बांस की कई दुर्लभ प्रजातियों के पौधे उपलब्ध हैं।
वन राज्यमंत्री डॉ. अरुण कुमार ने बताया कि नेशनल हाईवे व अन्य सड़कों के चौड़ीकरण और विकास के लिए जितने पेड़ों को काटा गया है, उससे कहीं ज्यादा पौधे भी रोपे गए हैं। प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम एक पौधा जरूर लगाना चाहिए और पेड़ बनने तक उसकी देखभाल करनी चाहिए।