बरेली। मां ने खुद को जिंदा साबित करने के लिए काफी संघर्ष किया। नगर पालिका और तहसील कार्यालय में जाकर जिम्मेदारों के हाथ जोड़े, लेकिन जब कुछ नहीं हुआ तो थक-हारकर घर बैठ गईं। दोबारा विधवा पेंशन पाने की उम्मीद छोड़ दी। यह कहना है बहेड़ी के वार्ड-14 की निवासी मनजीत कौर के बेटे बलविंदर सिंह का। क्यारा ब्लॉक की ग्राम पंचायत मानपुर चिकटिया के मजरा भउवापुर निवासी आरिफ ने बताया कि उनकी दादी खुशनुमा की भी पेंशन छह माह से बंद है। वह खुद को जिंदा साबित करने के लिए भटक रहीं हैं।
इन महिलाओं ने पहले नियति की मार सही। पति को खोने के बाद पेंशन के सहारे जिंदगी की गाड़ी घिसट रही थी कि सिस्टम ने उनको ही मृत दिखाकर पेंशन बंद कर दी। ऐसे 30-35 मामले रोज कलक्ट्रेट में आ रहे हैं। आलमपुर जाफराबाद के बल्लिया की मीना देवी, आंवला के गांव घेर पीतम राय की नजमा बेगम, सदर तहसील के रिठौरा की मुन्नी, मिथलेश, फूलवती और शहर में सुभाषनगर की ललिता देवी समेत अन्य कई महिलाओं को मृत दिखाकर उनकी पेंशन बंद कर दी गई है। कुछ विधवाओं को अपात्र घोषित कर उनकी पेंशन बंद की गई है।
एसडीएम-बीडीओ को कार्रवाई के निर्देश
डीएम अविनाश सिंह ने सदर, आंवला और बहेड़ी के एसडीएम, आलमपुर जाफराबाद, बहेड़ी, भोजीपुरा, भुता, बिथरी चैनपुर, फरीदपुर, क्यारा, मझगवां और नवाबगंज ब्लॉक के बीडीओ को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा है कि निराश्रित महिला पेंशन योजना में लाभार्थियों का अप्रैल-मई में सघन सत्यापन हुआ था। रिपोर्ट में जीवित महिलाओं को भी मृतक दिखाया गया। इसमें 20 महिलाएं स्वयं जिला प्रोबेशन अधिकारी के सामने उपस्थित हुईं और अपने जीवित होने का प्रमाणपत्र दिया। डीएम ने कहा है कि इन 20 महिलाओं के सत्यापन में जिसने भी लापरवाही बरती है, उसके विरुद्ध कार्रवाई करके बताएं। संवाद